
बंदरगाहों पर अटका हजारों करोड़ का माल (Image - Freepik)
West Asia War Impact: पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और व्यापारिक मार्गों पर अनिश्चितता का माहौल बन गया है। इसका सीधा असर भारत के निर्यात पर पड़ रहा है। मुरादाबाद के पीतल और मेटल उत्पादों के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश से निर्यात होने वाला बासमती चावल भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इन क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में सामान मध्य पूर्व सहित कई देशों में भेजा जाता है, लेकिन मौजूदा हालात में सप्लाई चेन बाधित हो गई है।
निर्यातकों के अनुसार भारत से सऊदी अरब और अन्य मध्य पूर्वी देशों के लिए भेजा गया माल समुद्री मार्गों में ही अटक गया है। अनुमान है कि लगभग 40 से 45 हजार कंटेनर अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों और ट्रांजिट मार्गों में फंसे हुए हैं। इन कंटेनरों में पीतल हस्तशिल्प, मेटल उत्पाद, चावल और अन्य निर्यात सामग्री शामिल है। इस स्थिति ने निर्यात कारोबार को भारी संकट में डाल दिया है।
कंटेनरों के फंसने के कारण निर्यात लागत में भी भारी इजाफा हुआ है। सामान्य दिनों में एक कंटेनर के परिवहन पर लगभग 800 से 1500 डॉलर तक खर्च आता था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में अतिरिक्त सरचार्ज के रूप में 3000 से 5000 डॉलर तक देना पड़ रहा है। इससे निर्यातकों की लागत लगभग पांच गुना तक बढ़ गई है, जो उद्योगों के लिए बड़ा झटका साबित हो रहा है।
व्यापार से जुड़े जानकारों का कहना है कि मौजूदा संकट के कारण अब तक करीब दो हजार करोड़ रुपये के निर्यात पर असर पड़ चुका है। विशेष रूप से मुरादाबाद और संभल के हस्तशिल्प उत्पादों की विदेशों में अच्छी मांग रहती है। इसके अलावा बासमती चावल का निर्यात भी कई देशों में होता है, लेकिन युद्ध के कारण यह व्यापार बुरी तरह बाधित हो गया है।
निर्यातकों के मुताबिक एक मार्च से ही भारत के बंदरगाहों से चावल का निर्यात लगभग ठप हो गया है। इस समय करीब दो लाख टन बासमती चावल, जिसकी कीमत करीब 1700 से 1800 करोड़ रुपये बताई जा रही है, विभिन्न बंदरगाहों और समुद्री मार्गों में फंसा हुआ है। इसके अलावा भारत के बंदरगाहों पर भी करीब दो लाख टन चावल लोड होकर भेजे जाने का इंतजार कर रहा है।
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रधान सतीश गोयल के अनुसार युद्ध के कारण वैश्विक व्यापारिक माहौल प्रभावित हुआ है। इससे भारतीय चावल का निर्यात भी रुक गया है और हजारों टन माल बंदरगाहों तथा समुद्री मार्गों में फंसा हुआ है। उन्होंने बताया कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मेटल हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष नवेद उर रहमान का कहना है कि इस संकट का सबसे अधिक असर छोटे और मध्यम उद्योगों पर पड़ रहा है। मुरादाबाद के पीतल और मेटल उद्योग में बड़ी संख्या में एमएसएमई इकाइयां काम करती हैं, जो निर्यात पर निर्भर हैं। कंटेनरों के फंसने और अतिरिक्त चार्ज बढ़ने से इन उद्यमियों पर भारी आर्थिक दबाव बन गया है।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन मुरादाबाद के मंडलीय सचिव कमल कौशल वार्ष्णेय के अनुसार संभल से हड्डी-सींग और लकड़ी के उत्पादों का निर्यात बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसके अलावा मेंथा और चावल भी विदेशों में भेजे जाते हैं। लेकिन समुद्री मार्गों में माल फंसने के कारण इन उत्पादों की सप्लाई प्रभावित हो रही है और उद्यमियों को भारी नुकसान की आशंका है।
निर्यात कारोबार से जुड़े संगठनों का कहना है कि यदि जल्द हालात सामान्य नहीं हुए तो मुरादाबाद सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की निर्यात श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ सकता है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार और शिपिंग कंपनियां मिलकर जल्द समाधान निकालेंगी, ताकि निर्यात फिर से सामान्य गति से शुरू हो सके और उद्योगों को राहत मिल सके।
Published on:
10 Mar 2026 12:31 pm
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