
दुल्हनों को पाजेब-बिछुआ तक नहीं मिले | Image Video Grab
Moradabad mass marriage scheme Corruption: मुरादाबाद में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत हुए भव्य समारोह अब गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते जांच के घेरे में आ गए हैं।
समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने मामले की निष्पक्ष और गहन पड़ताल के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जो जिले के विभिन्न ब्लॉकों और गांवों में जाकर दस्तावेजों और लाभार्थियों का सत्यापन कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच की प्राथमिक रिपोर्ट में ही कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच टीमों ने मंगलवार शाम तक करीब 20 प्रतिशत रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी है, लेकिन इसी शुरुआती रिपोर्ट ने समारोह की खामियों की तस्वीर स्पष्ट कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई दुल्हनों को पाजेब और बिछुआ जैसे आवश्यक आभूषण नहीं मिले, जबकि कुछ जोड़ों को गद्दे और अन्य जरूरी घरेलू सामान के बिना ही विदा कर दिया गया। कहीं उपहारों की सूची अधूरी रही तो कहीं लाभार्थियों को खाली हाथ लौटना पड़ा, जिससे योजना के उद्देश्य पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कुछ मामलों में दुल्हनों को इलाज या अन्य लाभ का लालच देकर दोबारा विवाह मंच पर बैठाया गया। वहीं, कुछ युवतियों को बिना विधिवत विवाह संपन्न हुए ही साड़ी का जोड़ा पहना दिया गया, जिससे कार्यक्रम की पारदर्शिता और प्रामाणिकता पर संदेह गहरा गया है। इन घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि केवल सामान वितरण ही नहीं, बल्कि पूरे आयोजन की प्रक्रिया में गंभीर स्तर पर लापरवाही और नियमों की अनदेखी की गई।
संपूर्ण जांच पूरी होने के बाद कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। कुंदरकी के विधायक रामवीर सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद मुख्य विकास अधिकारी के आदेश पर जांच शुरू की गई थी। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यदि रिपोर्ट में गड़बड़ियों की पुष्टि होती है, तो केवल निचले स्तर के कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
जिला विकास अधिकारी जीबी पाठक ने बताया कि जांच के लिए 30 टीमें गठित की गई थीं, जिन्हें विभिन्न गांवों में जाकर लाभार्थियों से सीधे संपर्क कर जानकारी जुटाने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, गांवों की दूरी और मामलों की संख्या अधिक होने के कारण तय समय में पूरी रिपोर्ट नहीं आ सकी। अब तक प्राप्त रिपोर्टों में लगभग हर जगह सामान वितरण और पात्रता की प्रक्रिया में खामियां दर्ज की गई हैं, जो पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं।
अधिकांश जांच रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ लाभार्थी वास्तव में योजना के लिए पात्र नहीं थे। कई ऐसे जोड़े पाए गए हैं, जिनकी शादी पहले ही हो चुकी थी या बाद में होने वाली थी, फिर भी उन्हें योजना का लाभ दे दिया गया। नियमों के अनुसार, यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बनाई गई है, ताकि वे अपनी बेटियों का विवाह सम्मानजनक तरीके से कर सकें, लेकिन सत्यापन की कमजोरी ने इस उद्देश्य को प्रभावित किया है।
जांच में यह बात भी सामने आई है कि लक्ष्य पूर्ति के दबाव में नियमों और शर्तों को नजरअंदाज किया गया। जिन परिवारों की बेटियों की शादी पहले ही हो चुकी थी, उन्हें भी लाभ दिया गया, जो स्पष्ट रूप से योजना के दिशा-निर्देशों के खिलाफ है। यदि अंतिम रिपोर्ट में इन तथ्यों की पुष्टि होती है, तो सूची तैयार करने और सत्यापन करने वाले अधिकारियों के साथ-साथ निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
जिला विकास अधिकारी जीपी पाठक ने कहा कि जांच प्रक्रिया अभी जारी है और कुछ अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिनमें सामान वितरण में अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि शेष रिपोर्ट आने के बाद एक समग्र दस्तावेज तैयार किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन का दावा है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई न जाए।
योजना के तहत दुल्हनों को पांच ब्लाउज सहित साड़ी या लहंगा, एक पैंट-शर्ट का कपड़ा, फेंटा (गमछा), चांदी की पायल और बिछुआ, डिनर सेट, प्रेशर कुकर, ट्रॉली बैग, दीवार घड़ी, कढ़ाई मशीन, कूल केज, आयरन प्रेस, सीलिंग फैन, डबल बेड शीट, दो कंबल, दो गद्दे या मैट्रेस, दो तकिए, सिंहोरा, लाल चूड़ियां, लाख से बने कंगन और 16 आइटम की वेनिटी किट दिए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा डबल बर्नर गैस चूल्हा और कैसरोल भी शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 25 हजार रुपये आंकी गई है।
मूंढ़ापांडे और कुंदरकी ब्लॉक में सबसे अधिक गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आने के बाद जिला समाज कल्याण अधिकारी पंखुड़ी जैन ने सहायक विकास अधिकारी (समाज कल्याण) प्रशांत सिंह और ललित कुमार को तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। अब इन दोनों पर निलंबन की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
राज्यमंत्री असीम अरुण ने बताया कि गठित तीन सदस्यीय कमेटी चार प्रमुख बिंदुओं पर जांच कर रही है, जिसमें लाभार्थियों की पात्रता, सामान वितरण की प्रक्रिया, आयोजन की पारदर्शिता और अधिकारियों की भूमिका शामिल है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि इस जनकल्याणकारी योजना की विश्वसनीयता बनी रहे।
Published on:
04 Feb 2026 06:05 pm
बड़ी खबरें
View Allमुरादाबाद
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
