उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा मार्गों पर स्थित ढाबों और रेस्टोरेंट मालिकों की पहचान सार्वजनिक करने के सरकार के कदम को लेकर विवाद गहरा गया है। मुरादाबाद की समाजवादी पार्टी की सांसद रुचि वीरा ने इस मामले को लेकर यूपी सरकार पर निशाना साधा है।
रुचि वीरा ने कांवड़ रूट्स के लिए जारी की गई गाइडलाइंस पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह एक लोकतांत्रिक देश है, जहां भारतीय संविधान का पालन किया जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी व्यक्ति की पहचान को इस तरह से उजागर करने की कोई आवश्यकता नहीं है।वीरा ने आगे कहा कि किसी भी धर्म या समुदाय का व्यक्ति कोई भी व्यवसाय करने के लिए स्वतंत्र है।
रुचि वीरा ने स्पष्ट किया कि चाहे वह हिंदू, मुस्लिम, सिख, दलित हो या किसी भी अन्य धर्म से संबंधित हो, उन्हें दुकान या व्यवसाय चलाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि यह खरीददार पर निर्भर करता है कि वह क्या खरीदना चाहता है, क्या खाना चाहता है और क्या नहीं खाना चाहता है। सांसद ने पहचान उजागर करने के नाम पर लोगों को अलग करना या बांटना गलत बताया और इसकी कड़ी आलोचना की।
रुचि वीरा ने कहा कि जहां तक नाम छिपाकर कारोबार करने वाली बात है, तो नाम छिपाने की जरूरत नहीं है। हम इस देश के नागरिक हैं। हमारे माता-पिता ने हमारा नाम रखा है, जिसे छिपाने की कोई जरूरत नहीं है। फक्र के साथ अपना नाम बताएं, लेकिन जहां तक कारोबार का सिलसिला है तो कोई भी इंसान कोई भी कारोबार कर सकता है, कुछ भी बेच और खरीद सकता है।
उदयपुर में कन्हैयालाल हत्याकांड पर बनी उदयपुर फाइल्स फिल्म को लेकर सपा की सांसद रुचि वीरा ने कहा कि कोई भी ऐसी फिल्म को सेंसर बोर्ड पास न करें, जिससे साम्प्रदायिक सौहार्द में कमी आए। मैंने अभी फिल्म नहीं देखी है। अगर फिल्म में ऐसा अंदेशा है कि लोगों में उन्माद हो सकता है, उनकी भावना आहत हो सकती है तो ऐसा कुछ न हो, क्योंकि घटनाएं तो तरह-तरह की होती ही रहती हैं। उन सबको एक फिल्म के रूप में प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं है।