
जय प्रकाश/ मुरादाबाद. देश कितना ही बदल गया हो, लेकिन यहां के राजाओं के ठाठ बाट किसी से छिपे नहीं है। खासकर इनके खानपान के तौर तरीके। लेकिन, नई पीढ़ी कही इसे भुला न दे, इसी के मद्देनजर दिल्ली में इन दिनों एक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें रामपुर के नबाब खानदान के नवेद मियां भी परिवार समेत भाग ले रहे हैं। दरअसल, महलों में खाए जाने वाले प्राचीन व्यंजनों को दुनिया के सामने लाने के लिए रामपुर रियासत समेत 36 रियासतों के वंशजों ने दिल्ली स्थित बेलजियम दूतावास में 26 से 29 अक्तुबर तक भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया है। 'ईट विद इंडिया' संस्था की सोनल सक्सेना द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भारत में बेलजियम के राजदूत यान लियूक्स और उनकी पतनी राका सिंह का विशेष सहयोग रहा। रियासतों के शाही पकवान परोसे जाने के साथ-साथ संगीत की महफिलें भी सजीं। काफी संख्या में लोगों ने शाही परिवारों के सदस्यों के साथ शानदार संरक्षित शाही विरासत भोजन का लुत्फ उठाया।
पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां 'नवेद मियां' के पीआरओ काशिफ खान ने बताया कि उक्त आयोजन में रामपुर के अलावा कोटवारा, भोपाल, बालासिनोर, मेवाड, राघोगढ़, लिमड़ी, अमरकोट, भैंसौरगढ़, बोलांगीर, केनौता, अखेराज देओलिया, लोहारू, झाबुआ, वाडनौर, संदूर, सिरमौर, मारवाढ़ और महमूदाबाद आदि रियासतों ने प्रमुख रूप से हिस्सा लिया। कार्यक्रम में रामपुर रियासत के शाही पकवान युवा कुक महफूज कुरैशी ने बनाए। नवाब काजिम अली खां 'नवेद मियां' के साथ ही उनके परिवार के तमाम लोग आयोजन में शामिल रहे।
नबाब काजिम अली खां उर्फ़ नावेद मियाँ ने बताया कि आज भी रामपुर का व्यंजन रियासतों का सबसे अच्छा भोजन है। हालांकि, समय की सीमा के साथ रसोइयों की संख्या में कमी आई है, क्योंकि उनमें से कुछ मर जाते हैं और कुछ बेहतर अवसरों के लिए छोड़ देते हैं। दुखद बात यह है कि रसोई में काम करते समय उन्होंने अपने बेटों या उत्तराधिकारियों को व्यंजनों को नहीं सिखाया था। उन्हें डर था कि वह अपने महत्व को खो देंगे। अब बहुत कोशिश करके शाही व्यंजनों को पुनर्जीवित किया गया है ।
Published on:
28 Oct 2017 10:10 pm

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