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ग्रेजुएशन और पीएचडी छात्रों पर यूनिफॉर्म थोपना सही नहीं: राज्यपाल के आदेश पर सपा नेता एसटी हसन का बड़ा बयान

UP News: मुरादाबाद में सपा नेता एसटी हसन ने यूनिवर्सिटी ड्रेस कोड पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उच्च शिक्षा में छात्रों पर यूनिफॉर्म थोपना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि हिजाब, पगड़ी और टोपी जैसे धार्मिक प्रतीकों पर किसी तरह की रोक नहीं लगनी चाहिए।

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st hasan on university dress code up

राज्यपाल के आदेश पर सपा नेता एसटी हसन का बड़ा बयान

ST Hasan University Dress Code:उत्तर प्रदेश की यूनिवर्सिटियों में यूनिफॉर्म लागू करने को लेकर सियासत तेज हो गई है। राज्यपाल के निर्देश के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एसटी हसन ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर तक यूनिफॉर्म व्यवस्था व्यावहारिक और संभव है, लेकिन उच्च शिक्षा में इसे लागू करना सही नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, एमफिल और पीएचडी जैसे कोर्स करने वाले छात्रों की सोच और आवश्यकताएं अलग होती हैं, इसलिए उन पर एक जैसी ड्रेस थोपना उचित नहीं होगा।

धार्मिक पहचान पर किसी तरह की पाबंदी नहीं होनी चाहिए

एसटी हसन ने अपने बयान में धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र को पगड़ी, हिजाब या टोपी पहनने से नहीं रोका जाना चाहिए। उनके मुताबिक भारत एक लोकतांत्रिक और विविधताओं वाला देश है, जहां हर व्यक्ति को अपनी धार्मिक पहचान और परंपराओं के अनुसार कपड़े पहनने की आजादी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों में अनुशासन जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाना गलत संदेश देगा।

यूनिवर्सिटी कैंपस में स्वतंत्रता और अनुशासन के बीच संतुलन जरूरी

सपा नेता ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल पढ़ाई की जगह नहीं होते, बल्कि वहां छात्रों की वैचारिक और सामाजिक समझ भी विकसित होती है। ऐसे में छात्रों को पूरी तरह एक तय ड्रेस कोड में बांधना उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि किसी यूनिवर्सिटी को अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ दिशा-निर्देश तय करने हैं, तो वह छात्रों और शिक्षकों से बातचीत के बाद ही होने चाहिए ताकि किसी वर्ग को असहज महसूस न हो।

राजनीतिक गलियारों में बयान को लेकर बढ़ी चर्चा

एसटी हसन के इस बयान के बाद राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में बहस और तेज हो गई है। कुछ लोग इसे छात्रों की स्वतंत्रता के पक्ष में बताया जा रहा है, जबकि कुछ का मानना है कि यूनिफॉर्म से संस्थानों में समानता और अनुशासन बढ़ता है। फिलहाल राज्यपाल के निर्देश और सरकार की आगे की नीति पर सभी की नजर बनी हुई है।

छात्रों की प्रतिक्रिया पर भी नजर

यूनिवर्सिटी ड्रेस कोड को लेकर छात्रों के बीच भी अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ छात्रों का मानना है कि यूनिफॉर्म से कैंपस में समानता और अनुशासन बढ़ेगा, जबकि कई छात्र इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं।

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