
ग्लोबल जंग का लोकल असर | Image - X/@ANI
UP exporters hit by iran israel us war: ईरान पर इस्राइल और अमेरिका के हमलों के बाद उत्तर प्रदेश की पीतलनगरी माने जाने वाले मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग पर संकट के बादल गहराने लगे हैं। मुरादाबाद जिले से अमेरिका, जापान और मिडिल ईस्ट के देशों में बड़े पैमाने पर हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात होता है।
युद्ध की आशंका बढ़ते ही जिले के करीब 2400 निर्यातकों में चिंता का माहौल बन गया है। निर्यातकों को डर है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा तो विदेशी खरीदार अपने ऑर्डर होल्ड कर सकते हैं या पूरी तरह कैंसिल कर सकते हैं, जिससे कारोबार पर सीधा असर पड़ेगा।
मुरादाबाद से हर साल करीब 8000 से 9000 करोड़ रुपये के हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात होता है। इन उत्पादों की सबसे बड़ी मार्केट अमेरिका, जापान और मिडिल ईस्ट के देश हैं। उद्योग से जुड़े कारोबारी बताते हैं कि इन क्षेत्रों में किसी भी तरह का राजनीतिक या सैन्य तनाव आते ही सबसे पहले ऑर्डर प्रभावित होते हैं। मौजूदा हालात में विदेशी खरीदार नए ऑर्डर देने से हिचकिचा रहे हैं और पहले से फाइनल हुए ऑर्डर भी रिव्यू में डाल दिए गए हैं। इससे जिले के निर्यातकों की नकदी व्यवस्था पर बड़ा दबाव पड़ सकता है।
निर्यातकों के अनुसार जर्मनी के फ्रैंकफुर्त में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड फेयर और दिल्ली के हैंडीक्राफ्ट फेयर में मिले कई अहम ऑर्डर फिलहाल होल्ड कर दिए गए हैं। कुछ खरीदारों ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि युद्ध की स्थिति साफ होने के बाद ही वे ऑर्डर कन्फर्म करेंगे। जिन निर्यातकों की बातचीत नए खरीदारों से चल रही थी, वहां भी डील फाइनल होने की प्रक्रिया रुक गई है। इससे आने वाले महीनों में नए ऑर्डर मिलने की संभावनाएं कमजोर पड़ सकती हैं।
हस्तशिल्प उद्योग से जुड़े कई निर्यातकों का अनुमान है कि अगर युद्ध लंबा चला तो जिले के सैकड़ों निर्यातकों का करीब 75 प्रतिशत कारोबार प्रभावित हो सकता है। पहले से ही टैरिफ बढ़ोतरी और कच्चे माल की महंगाई ने निर्यातकों की कमर तोड़ रखी है। वर्ष 2025 में अकेले अमेरिका से होने वाला निर्यात आधे से ज्यादा घट चुका है। अब युद्ध का असर जुड़ने से निर्यातकों को दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है।
युद्ध का असर सिर्फ ऑर्डर पर ही नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन पर पड़ने की आशंका है। निर्यातकों का कहना है कि शिपिंग रूट बाधित होने से माल ढुलाई महंगी हो सकती है। कंटेनर की उपलब्धता कम होगी और भाड़ा बढ़ने से लागत में सीधा इजाफा होगा। वहीं, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव तेज होने की संभावना है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और मुनाफा घटेगा।
विदेशी बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने से भुगतान में देरी की समस्या भी सामने आ सकती है। कई खरीदार पहले से किए गए ऑर्डर के भुगतान को टाल सकते हैं या क्रेडिट पीरियड बढ़ाने की मांग कर सकते हैं। इससे निर्यातकों की कैश फ्लो व्यवस्था बिगड़ सकती है। छोटे और मझोले निर्यातकों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि उनकी कार्यशील पूंजी सीमित होती है।
हस्तशिल्प निर्यात से जुड़े संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि अगर युद्ध जल्द नहीं थमता तो आने वाले दिनों में फैक्ट्रियों में कामकाज प्रभावित होने लगेगा। निर्यातकों के अनुसार फ्रैंकफुर्त मेले और तुर्की में मिले ऑर्डर रुकने से उत्पादन घट सकता है। अगर शिपिंग कंपनियों की सेवाएं बाधित होती हैं, तो तैयार माल का स्टॉक गोदामों में जमा हो जाएगा और नई प्रोडक्शन रोकनी पड़ सकती है।
हस्तशिल्प उद्योग से हजारों कारीगर जुड़े हुए हैं, जिनकी आजीविका सीधे तौर पर निर्यात पर निर्भर करती है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि पहले ही कारीगर कच्चे माल की महंगाई, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और लॉजिस्टिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। अब युद्ध के कारण अगर निर्यात घटता है, तो सैकड़ों कारीगरों की नौकरियों पर संकट आ सकता है। इससे सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी जिले में असर दिख सकता है।
निर्यातकों का मानना है कि युद्ध के चार से छह दिन बाद स्थिति कुछ हद तक साफ होने लगेगी। तब पता चलेगा कि कितने करोड़ रुपये का निर्यात प्रभावित हुआ और कितने ऑर्डर रद्द किए गए हैं। फिलहाल सभी की निगाहें वैश्विक हालात पर टिकी हैं। निर्यातक उम्मीद कर रहे हैं कि हालात जल्द सामान्य होंगे ताकि पीतलनगरी की अर्थव्यवस्था को गहरा झटका न लगे।
Updated on:
01 Mar 2026 02:24 pm
Published on:
01 Mar 2026 02:24 pm
