
जैन समाज के नहीं, सर्व समाज के संत थे आचार्य विद्यासागर
मुरैना. जैनाचार्य विद्यासागर केवल जैन समाज के ही नहीं बल्कि वह तो सर्व समाज के संत थे। आचार्य श्री ने अपना सम्पूर्ण जीवन अहिंसा, शाकाहार और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उनकी समाधि का समाचार सुनकर सम्पूर्ण जनमानस में शोक में डूब गया। किसी को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि गुरुदेव हमें छोडकऱ चले गए। आचार्य श्री के द्वारा किए गए कल्याणकारी कार्य हमारी स्मृति में और आचार्य श्री हमारे ह्रदय में सदैव विराजमान रहेंगे। उक्त उदगार मध्य प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री गिर्राज डंडोतिया ने बड़ा जैन मंदिर मुरैना की विन्यांजली सभा में व्यक्त किए।
समाजसेवी मनोज जैन नायक ने बताया कि जैन तीर्थ चंद्रगिरी डोगरगढ में गुरुदेव संत दिगम्बराचार्य विद्यासागर महाराज 17-18 फरवरी की मध्यरात्रि 02:35 पर समाधि प्राप्तकर ब्रह्मलीन हो गए। जैन समाज मुरैना द्वारा उनको श्रद्धासुमन अर्पित करने हेतु बड़े जैन मंदिर में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में साधर्मी बंधु, माता बहिनें, युवा साथी सम्मिलित हुए। विनयांजलि सभा में सभी लोग अपने अपने घर से घी का दीपक लेकर आए थे। सभी ने दीप प्रज्ज्वलित कर आचार्य श्री को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। श्रद्धा सुमन अर्पित करते समय वक्ताओं ने आचार्य श्री के संस्मरण सुनाते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता के रूप मंदिर कमेटी के अध्यक्ष महेश चंद बंगाली, मंत्री एडवोकेट धर्मेंद्र जैन, टिकटोली के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी, संस्कृत विद्यालय के कार्याध्यक्ष मनोज जैन, पूर्व मंत्री पवन जैन, पल्लीवाल मंदिर के अध्यक्ष शेखर जैन, बाबूलाल जैन, पंकज जैन, चक्रेश शास्त्री, संजय शास्त्री, राजकुमार जैन, मुन्नी साहूला, संगीता जैन, चेतनमाला जैन आदि शामिल रहे।
अंचल में दी
अंचल में भी किया याद
जैन संत को मुरैना के अलावा, अंबाह, सुमावली सहित पूरे अंचल में याद किया गया। उनके पुराने संस्करण को सुनकर लोगों के गले रुंध रहे हैं।
Published on:
22 Feb 2024 10:34 am

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