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भैंस चोरी के बाद राजीनामा नहीं किया तो दबंगों ने तोड़े दलित के पैर, अब पुलिस दर्ज नहीं कर रही केस

दबंगों ने भैंस चोरी के केस में राजीनामा न करने पर दलित युवक को इतनी बेरहमी से पीटा की उसके पैर टूट गए।

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भैंस चोरी के बाद राजीनामा नहीं किया तो दबंगों ने तोड़े दलित के पैर, अब पुलिस दर्ज नहीं कर रही केस

मुरैना. मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के एक गांव में दबंगों के बेखौफ होसले का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां दबंगों ने भैंस चोरी के केस में राजीनामा न करने पर दलित युवक को इतनी बेरहमी से पीटा की उसके पैर टूट गए। हैरानी की बात तो ये है कि, उसके साथ हुई बेरहमी की शिकायत अब पुलिस तक नहीं सुन रही है। बताया जा रहा है कि, पुलिस युवक की रिपोर्ट ही दर्ज करने को तैयार नहीं है। थाने के व्यव्हार से निराश होकर पीड़ित जब एसपी ऑफिस पहुंचा तो वहां भी उसका संपर्क किसी अधिकारी से नहीं हो सका। न्याय के तमाम दरवाजों से निराश हाथ लगने के बाद दलित पीड़ित ने परिवार के साथ आत्महत्या करने की बात कही है।

सरायछोला थाना इलाके के पीपलखेड़ा गांव में रहने वाले दलित परिवार सोमवार देर शाम ट्राईसाईकिल में बैठकर एसपी कार्यालय पहुंचा और अपने परिवार की सुरक्षा की फरियाद की। साथ ही उसने पुलिस के रवैया से परेशान होकर परिवार सहित आत्महत्या की बात कही है। एसपी को दिए आवेदन में रामसिया कोरी ने कहा कि, गांव के दबंग मेरी तीन बार भैंस चोरी कर चुके हैं। इस मामले में रिपोर्ट की गई। लेकिन राजीनामा न करने पर 9 दिसंबर 2020 को बंधा चौराहा हाइवे पर एक्सीडेंट करके जान से मारने की कोशिश की गई। सरायछोला थाने ने एक्सीडेंट की रिपोर्ट लिखी, उसमें मेरा नाम गलत लिख दिया। इस मामले में राजीनामा नहीं करने पर 30 सितंबर को मेरे बेटे पुलेंद्र माहौर को रात 8 बजे दबंगों ने लात घूसों और डंडा से जमकर पीटा और जातीय आधार पर अपमानित भी किया। 1 अक्टूबर की सुबह उनके घर गए, जहां से उन्होंने हमें गालियां देकर भगा दिया। डायल 100 पर फोन किया, तो पुलिस मेरी पत्नी को रिपोर्ट लिखवाने थाने ले गई। वहां दिनभर बैठाकर रखा और शाम को भगा दिया। फिर दूसरे दिन मैं खुद थाने पहुंचा तो उन्होंने आश्वासन देते हुए कहा कि, आप जाइये हम एक घंटे में गांव पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज करते हैं। लेकिन, पुलिस अबतक गांव नहीं पहुंची है।

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शिवराज सरकार में दलित परिवार की सहायता होगी या उन्हें गांव छोड़कर जाना होगा ?

पीड़ित रामसिया का कहना है कि, पुलिस तो नहीं आई पर जब घर पहुंचा तो कुछ ही देर में वहां दबंग बंदूक और कट्टा लेकर आ गए और रिपोर्ट करने पर धमकी देने लगे। दबंगों ने कहा कि, अभी तो पैर टूटे है, जान से मार देंगे और गांव से निकाल देंगे। उसके बाद से थाने में संपर्क कर रहे हैं, लेकिन कोई रिपोर्ट लिखने को तैयार नहीं है। इसीलिए न्याय की गुहार लगाने एसपी ऑफिस आए हैं, लेकिन यहां भी पुलिस अधीक्षक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के न मिलने से की गई शिकायत अधर में लटकी मेहसूस हो रही है। पुलिस के इस व्यवहार और कार्यप्रणाली से दुखी होकर उसने परिवार के साथ आत्महत्या करने की बात कही है। अब देखने वाली बात ये है कि, शिवराज सिंह चौहान की सरकार में पीड़ित दलित परिवार की कोई सहायता होगी या उन्हें गांव छोड़कर जाना पड़ेगा।

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