
कैसे हो पानी की समस्या हल, खारे पानी की समस्या से जूझ रहे तीन गांव के हजारों लोग, चार किमी दूर सिर्फ एक हैडपंप ही है सहारा, वाहनों से ढो रहे हैं पानी, 5 किमी दूर निरार थाने के लिए भी जाता है इसी हैडपंप से पानी
मुरैना. पेयजल की समस्या को लेकर कलेक्टर ने कई बार बैठक ली, तमाम निर्देश दिए और कंट्रोल रूम भी स्थापित किया लेकिन ये व्यवस्थाएं कारगर साबित नहीं हो रही हैं। परसोटा के गंगाधर रावत ने शुक्रवार की शाम 04.34 बजे और बंटी रावत ने 04.40 बजे प्रभारी राहुल पलिया इंजीनियर को मोबाइल पर फोन लगाया लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव नही किया। इसी तरह की शिकायत अन्य विकासखंडों में भी मिल रही हैं।
ग्रामीण इलाके में आज भी लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। परसोटा, बल्लारपुर, टिकटौली गांवों में खारा पानी होने के बाद भी प्रशासन मीठे पानी की व्यवस्था नहीं करा सका है। मजबूरन ग्रामीणों को चार किमी दूर स्थित एक मात्र हैडपंप ही उनके लिए सहारा बना हुआ है। यहां तक 5 किमी दूर स्थित निरार थाने की गाड़ी भी इसी हैडपंप से पानी भरकर ले जा रही है। परसोटा गांव के जल स्रोतों में खारा व गंदा पानी होने से लोग परेशान हैं। यहां की करीब 3000 की आबादी आधा किमी दूर नहर के दूसरी पार स्थित एक मात्र हैडपंप उससे ही पानी भरकर लाते हैं। परसोटा में पेजयल व्यवस्था के नाम पर 18 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं लेकिन उसका परिणाम कुछ नहीं निकला। यहां उसी जगह बोर कराया गया, जहां मीठा पानी निकलता है लेकिन पाइप लाइन व टंकी का निर्माण न होने से पेयजल संकट बरकरार है। चार किमी दूर स्थित बल्लारपुर व टिकटौली गांव के लोग भी चार पहिया, तीन पहिया, दो पहिया वाहनों से इसी हैडपंप से पानी भरने आते हैं। यहां तक 5 किमी दूर स्थित निरार में भी खारे पानी की समस्या है, इसलिए थाने की गाड़ी भी केन लेकर इसी हैडपंप से पानी भरकर ले जाती है। स्थिति यह है कि हैडपंप पर सुबह-शाम महिला, बच्चे व पुरुषों की भीड़ लगती है।
कलेक्टर ने हर विकासखंड के लिए अलग अलग कंट्रोल रूम बनाया है, अगर किसी को पानी की समस्या है, तो संबंधित प्रभारी को फोन पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं लेकिन अक्सर इस तरह की शिकायत आ रही हैं कि कलेक्टर ने जो मोबाइल जारी किए हैं, वह अधिकारी मोबाइल रिसीव नहीं कर रहे। परसोटा के अलावा सुजरमां गांव और अन्य विकासखंड भी इस तरह की शिकायत मिल रही हैं।
परसोटा गांव में पिछले लंबे समय से मीठे पानी की समस्या है। पूरा गांव आधा किमी दूर नहर पर स्थित हैडपंप से पानी भरकर ला रहा है। पीएचई व कलेक्टर के यहां शिकायत की है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
मीठे पानी के लिए नहर पर एक मात्र हैडपंप है, उससे पानी भरकर लाना पड़ रहा है। वहां भी सुबह शाम भीड़ हो जाती है, लंबा इंतजार करना पड़ता है, तब कहीं एक बर्तन पानी भर पाते हैं।
गांव के लोग लंबे समय से पानी के लिए परेशान हैं, न क्षेत्रीय विधायक और न अधिकारी गांव में नहीं आते। शिकायत भी की है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
हमारी शादी को 25 साल हो गए लेकिन अभी तक नेता न अधिकारी, मीठे पानी की व्यवस्था नहीं करा सके। चुनाव के समय नेता वादा कर जाते हैं। लेकिन बाद में भूल जाते हैं।
पहले परसोटा गांव में लाइन डाली थी। लेकिन पुलिया निर्माण के दौरान पाइप लाइन टूट गई, अब फिर से योजना का रिवाइज किया है, एक करोड़ का टेंडर हुआ है, एक सप्ताह लगेगा, टेंडर खुलते ही नए सिरे से काम किया जाएगा और जहां मीठा पानी हैं, वहीं से गांव में पानी की सप्लाई दी जाएगी। परसोटा के ग्रामीणों का फोन आया था, उस समय मैं नहीं उठा पाया लेकिन बाद में मेरी उनसे बात हो गई है।
Updated on:
02 Jun 2026 10:15 am
Published on:
02 Jun 2026 10:15 am
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