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सरकारी केन्द्रों पर किसानों की लंबी लाइन, प्राइवेट में ब्लैक में बिक रहा खाद

- पर्याप्त खाद होने के प्रशासन के दावे खोखले, नहीं मिल रहा किसान को खाद, खाद नहीं मिलने पर किसानों ने किया हंगामा- मंडी परिसर में 1000 किसान लाइन में सिर्फ 350 को मिली पर्ची, अन्य किसान लौट- कृषि अधिकारी बोले, जिस केन्द्र की जितनी क्षमता, उसी हिसाब से बांटी जाती हैं पर्ची

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सरकारी केन्द्रों पर किसानों  की लंबी लाइन, प्राइवेट में ब्लैक में बिक रहा खाद

सरकारी केन्द्रों पर किसानों की लंबी लाइन, प्राइवेट में ब्लैक में बिक रहा खाद

मुरैना. प्रशासन दावा कर रहा है कि पर्याप्त खाद है लेकिन किसानों को तीन- चार दिन लाइन में लगना पड़ता है तब खाद मिलता है, वह भी दो बार लाइन में धक्का खाने पड़ते हैं एक बार पर्ची और दूसरी बार पैसे जमा करने के लिए। वहीं प्राइवेट दुकानों पर ब्लैक में खुलेआम खाद बिक रहा है। प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर किसानों में काफी आक्रोश व्याप्त है। कृषि मंडी परिसर में स्थित जिला विपणन सहकारी कार्यालय के गोदाम पर 24 नवंबर की सुबह करीब 1000 किसान लाइन में लगे थे जबकि सिर्फ 350 किसानों को खाद के लिए पर्ची दी गई। इस पर्ची पर चार दिन बाद खाद मिलेगा। जिन किसानों को पर्ची नहीं मिली तो उन्होंने हंगामा कर दिया।
किसान को सिस्टम से खाद मिल रहा होता तो वह शीत लहर में सुबह परेशान नहीं होता है। पर्ची के लिए किसान सुबह तीन- चार बजे से गांव से आकर लाइन में लगता है। लेकिन उसके बाद भी उसको पर्ची नहीं मिल पाती है और बिना पर्ची के खाद नहीं मिलता। कुछ किसान तो ऐसे थे, जो पिछले चार दिन से आकर लाइन में लग रहे हैं और जैसे ही उनका नंबर आता है तब तक पर्ची खत्म हो जाती हैं और वह घर लौट जाते हैं। शहर के तीन वितरण केन्द्रों के लिए मंडी परिसर से ही पर्ची बांटी जाती हैं इसलिए यहां अल सुबह से ही किसानों की लंबी लाइन लग जाती है। जिन किसानों को पर्ची नहीं मिली उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को घेर लिया। गोदाम के गेट पर चढकऱ किसानों ने हंगामा किया। किसानों को आक्रोशित होते देख अधिकारी गोदाम के दूसरे गेट से निकल गए और किसान वहां इंतजार करते रहे।
साहब! 28 को मौड़ी की शादी है, आज ही दिलवा दीजिए खाद
साहब! 28 नवंबर को मौड़ी की शादी है, खाद आज ही दिलवा दीजिए लेकिन किसी भी अधिकारी को दिल नहीं पसीजा और वह वृद्ध किसान दीवार के सहारे काफी देर तक बैठा रहा। यह किसान था चौखूटी निवासी मातादीन गुर्जर। उक्त किसान आज कृषि मंडी परिसर में विपणन सहकारी संघ के गोदाम पर खाद लेने आया था, कर्मचारियों ने उसको 28 नवंबर की पर्ची थमा दी और कहा कि उसी दिन आना तब खाद मिलेगा।
बच्चा भूखा आज है और खाना चार दिन बाद मिले, ऐसे तो वह मर ही जाएगा
कृषि विभाग के कर्मचारी जब पर्ची बांट रहे थे तो किसानों ने पूछा इस पर्ची का खाद कब मिलेगा तो कर्मचारी ने बताया कि 28 नवंबर को मिलेगा तब किसानों ने चुटकी लेकर कहा कि बच्चा आज भूंखा है और उसको खाना चार दिन बाद दिया जाए तो ऐसे तो वह मर ही जाएगा। किसानों के कहने का मतलब यह था कि खेतों में खाद की आवश्यकता आज है, चार दिन बाद नहीं।
कहां कितने किसानों को मिली पर्ची
विपणन सहकारी संघ के गोदाम स्थित मंडी परिसर पर 24 नवंबर को सुबह करीब 1000 किसान लाइन में लगा था लेकिन पर्ची सिर्फ 350 को दी गई। इसी तरह एम एग्रो के कार्यालय पर करीब 200 किसान लाइन में लगे थे, 70 का पर्ची दी गई। इसी तरह मार्केटिंग के नाम 106 और 40 किसानों को प्राइवेट दुकान से खाद लेने के लिए पर्ची थमाई गई। इनको भी 28 नवंबर को खाद मिलेगा।
क्या कहते हैं किसान
- मेरे पैर में चोट है, किसी तरह पर्ची तो ले ली, अब खाद 28 नवंबर को मिलेगा, उस दिन परिवार में मोड़ी की शादी है, खाद कैसे ले जाएं, नहीं आए तो बोनी के लिए लेट जो जाएंगे।
मातादीन गुर्जर, चौखूटी
- दस बीघा खेत है, दो कट्टे खाद चार दिन बाद मिलेगा, उसके लिए फिर से लाइन में धक्का खाने पड़ेगे। अधिकारियों को किसानों पीड़ा दिखाई नहीं दे रही।
अतेन्द्र सिंह गुर्जर, तिघरा
- प्राइवेट दुकानों पर खुलेआम 268 का यूरिया का कट्टा 300 और 1355 का डीएपी 1500 में बेचा जा रहा है। यह अधिकारियों को दिखाई नहीं दे रहा।
अजय, खासखेड़ा
- सरसों की बोनी के समय विधानसभा चुनाव था इसलिए आसानी से खाद मिल गया अब चुनाव हो गया तो खाद के लिए किसानों को परेशान किया जा रहा है।
अवधेश, ल्हौरी का पुरा
कथन
- विपणन सहकारी संघ हो एम पी एग्रो जहां वितरण की जितनी क्षमता होगी, उसी हिसाब से तो पर्ची बांटी जाएंगी। अगर किसान लौट रहा है तो उसको दूसरे दिन पर्ची बांटी जाएगी। रही बात ब्लैक में खाद बिकने की तो हम जांच करवा लेते हैं।
पी सी पटेल, उप संचालक, कृषि

प्राइवेट में खुलेआम बिक रहा ब्लैक में
कृषि व राजस्व अधिकारियों की मिली भगत से प्राइवेट दुकानों पर खुलेआम ब्लैक में खाद मिल रहा है। एसडीएम, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षकों ने पिछले दिनों कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ गोदामों के नाम पर दुकानों का निरीक्षण करके कलेक्टर को ओके रिपोर्ट भेज दी जबकि गोदामों से 1500 रुपए में डीएपी और 300 रुपए यूरिया खाद बेचा जा रहा है। गर्ग स्टूडियो के बगल में स्थित गोदाम हर समय बंद रहता है। वह तभी खुलता है जब कि ब्लैक में खाद बेचना हो या फिर उसमें माल स्टॉक करना हो। इसके अलावा इस गोदाम मालिक की दुकान के सामने स्थित एक अन्य दुकान से भी अधिकारियों की सांठगांठ से खुलेआम ब्लैक में खाद बिक रहा है।

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