
sand mafia illegal mining in chambal river (फोटो- Patrika.com)
MP News: देश की स्वच्छ नदियों में शुमार और जलीय जीवों जैसे घडिय़ाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन समेत बाटागुर कछुओं, प्रवासी पक्षियों के पसंदीदा आवास को रेत माफियां (Sand Mafia) उजाड़ रहे हैं। उनके अवैध उत्खनन से नदी छलनी हो रही है। घडिय़ालों के लिए संरक्षित मप्र, यूपी, राजस्थान से गुजरी चंबल नदी (Chambal River) के 435 किमी लंबे घडिय़ाल अभयारण्य में ही माफिया दिन-रात रेत का अवैध उत्खनन क रहे हैं। आलम यह है कि मुरैना जिले के 42 घाटों से रोज 1000 से अधिक ट्रेक्टर -ट्रॉलियों में रेत भरकर बाजार में खपाई जा रही है।
खास यह है कि नदी से रेत के अवैध उत्खनन (Illegal Mining) को रोकने के लिए ग्वालियर हाईकोर्ट ने एसएएफ की 120 जवानों की कंपनी वन विभाग को मुहैया कराई। लेकिन इस कंपनी को जिम्मेदार चुनावी ड्यूटी में लगा रहे हैं। चुनाव से फ्री होते भी बैरक में आराम फरमा रही है। सूत्रों की मानें तो वन विभाग समेत स्पेशल टास्क फोर्स कार्रवाई ही नहीं करना चाहता। नतीजा, नदी का सीना छलनी हो रहा है।
मुरैना जिले के 42 घाटों में से 8 पर मप्र सरकार खनन को वैध करने की तैयारी में है। सूत्रों की मानें तो घडिय़ाल सेंचुरी (Gharial Sanctuary) होने के कारण फिलहाल इस क्षेत्र में खनन को वैध करना मुश्किल है। ऐसे में सरकार ने केंद्र सरकार को 2022 में अनूठा प्रस्ताव भेजा है। इसमें कहा है, 8 घाटों पर घडिय़ाल समेत जलीय जीवों की संख्या कम है। इसलिए इन घाटों से रेत उत्खनन को वैध करने का प्रस्ताव भेजा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की हाईपॉवर्ड कमेटी के पेच के चलते प्रस्ताव अब तक केंद्र में ही अटका है।
रेत के अवैध उत्खनन पर वन विभाग के एसडीओ एसएस चौहान ने अजीब तर्क दिए। उनका कहना है, जब टीम राजघाट पर सर्चिंग करती है। तब अवैध उत्खनन होते नहीं मिलता है। सर्चिंग बढ़ाएंगे। सवाल यह है ये कैसी सर्चिंग है कि अवैध उत्खनन नहीं दिखता।
सबलगढ़: बरोठा, अटार, रतियापुरा, विहाना, करजौनी झुंडपुरा, बनवारा, रहूगांव।
चिन्नौनी/देवगढ़: गुढ़ा चंबल, कोल्हूडांड़ा, चिन्नौनी, बरवासिन, होराबराह।
मुरैना: कैमरा, कैंथरी, बंधा, हेतमपुर, गड़ौरा, पिपरई, रिठौरा।
अंबाह: कुथियाना, बीलपुर, ऐसाह, दलजीतपुरा, मलबसई
पोरसा: नगरा, महुआ। (MP News)
Published on:
02 Feb 2026 05:00 am

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