12 मार्च 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

चंबल एक्सप्रेस-वे के लिए मुफ्त जमीन देगी मप्र सरकार

तीन रा’यों के आधा दर्जन से अधिक जिले जुड़ेंगे सीधे, होगा औद्योगिक विकास। औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित होगा चंबल

2 min read
Google source verification
चंबल एक्सप्रेस-वे के लिए मुफ्त जमीन देगी मप्र सरकार

चंबल एक्सप्रेस-वे के लिए मुफ्त जमीन देगी मप्र सरकार

मुरैना. चंबल एक्सप्रेस-वे के निर्माण में उपयोगी जमीन की पूरी व्यवस्था रा’य सरकार करेगी। सरकार के पास इसके लिए 52 फीसदी जमीन उपलब्ध है, बाकी 48 प्रतिशत भू-स्वामियों से बदले में जमीन देकर ली जाएगी।

सरकार इस प्रोजेक्ट के लिए 100 प्रतिशत जमीन उपलब्ध कराने पर करीब 421 करोड़ रुपए खर्च करेगी। 300 करोड़ के आसपास खनिज रॉयल्टी की राशि भी सरकार देगी। शनिवार को केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडक़री से मुख्यमंत्री की वीसी में इसे सिद्धांत रूप से स्वीकार कर लिया है।

रॉयल्टी, वन भूमि अनुमति, जमीन उपलब्ध कराने सहित अन्य औपचारिकताओं पर मप्र सरकार 781 करोड़ रुपए का सहयोग देगी। भारतमाला परियोजना के तहत मात्र 50 प्रतिशत भूमि नि:शुल्क उपलब्ध कराने का प्रावधान है। लेकिन मप्र सरकार इसके लिए 421 करोड़ की 100 प्रतिशत भूमि नि:शुल्क उपलब्ध करा रही है। आर्थिक सहयोग के रूप में मिट्टी एवं मुरम &&0 करोड़ की रायल्टी के रूप में प्रदान करेगा। वन भूमि की अनुमतियों पर होने वाला 30 करोड़ का खर्च भी सरकार उठाएगी। इस मार्ग से तीन रा’यों के आधा दर्जन से अधिक जिले आपस में सीधे जुड़ जाएंगे। इसके अलावा एनएच-3 (मुरैना-धौलपुर के बीच), एनएच-92 (भिण्ड से इटावा के बीच) व एनएच 552 (भिण्ड से श्योपुर के बीच) भी इससे जुड़ेंगे।

309 किमी लंबा होगा प्रोग्रेस वे

चंबल प्रोग्रेस-वे मप्र में &09 किमी लंबा होगा। श्योपुर, मुरैना एवं भिण्ड से होते हुए राजस्थान व उत्तरप्रदेश की सीमाओंं को जोड़ेगा। यह मार्ग भिण्ड में आगरा-कानपुर मार्ग, मुरैना में नार्थ-साउथ कॉरीडोर एवं राजस्थान में दिल्ली मुम्बई कॉरीडोर से जोड़ा जाएगा। सीएम चौहान ने कहा कि रा’य शासन आर्थिक एवं औद्योगिक विकास के लिए रक्षा उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, भारी उद्योग, वेयर हाउसिंग, लॉजिस्टिक एवं परिवहन उद्योग के रूप में इस क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि चम्बल एक्सप्रेस-वे के लिए 52 प्रतिशत सरकारी जमीन उपलब्ध है। शेष 48 प्रतिशत भूमि अदला-बदली मॉडल के तहत उपलब्ध ली जाएगी।

सुरक्षित रहेगा घडिय़ाल अभयारण्य

प्रथम चरण में मप्र 195.30 किमी और राजस्थान में 85 किमी का निर्माण कार्य होगा। इसकी की कुल लंबाई &94.08 किमी है। मप्र में &09.08 किमी का मार्ग प्रस्तावित है। इसमें भिण्ड जिले का 113.7 किमी का मार्ग भी शामिल होगा। मार्ग की जो डिजाइन तैयार की गई है वह चंबल में बाढ़ के अधिकतम स्तर को ध्यान में रखकर की गई है। चंबल घडिय़ाल अभयारण्य के संवेदनशील क्षेत्र से 3.50 किमी सुरक्षित दायरा छोडऩा होगा। श्योपुर में 97.30 व मुरैना में 98 किमी का निर्माण प्रथम चरण में होगा। दूसरे में मुरैना में 46.50 व भिण्ड जिले में 67.28 किमी निर्माण शामिल है।