
मुरैना. जीवन रक्षक मानी जाने वाली 108 एम्बुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अंबाह नगर के व्यस्त पोरसा चौराहे पर 108 एम्बुलेंस में मरीजों की बजाय आम सवारियां भरते हुए देखे जाने का मामला सामने आया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एम्बुलेंस कुछ समय तक चौराहे पर खड़ी रही और उसमें यात्रियों को बैठाया गया। इसका वीडियो सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश व्याप्त हो गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस सेवा का उद्देश्य सडक़ दुर्घटनाओं, प्रसव पीड़ा, हार्ट अटैक या अन्य आपात स्थितियों में तत्काल राहत पहुंचाना है, वही सेवा यदि सवारी वाहन की तरह उपयोग होने लगे तो गंभीर मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है। इस सेवा का उपयोग केवल आपातकालीन परिस्थितियों के लिए निर्धारित है। किसी भी प्रकार से सवारी ढोना नियमों के विपरीत माना जाता है। 20 किलोमीटर में दो घंटे आखिर देरी कहां
नगर और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार 20 किलोमीटर की दूरी तय करने में एम्बुलेंस को दो घंटे तक का समय लग जाता है। जब मरीजों के परिजन 108 पर कॉल करते हैं तो उन्हें रास्ते में है कहकर आश्वस्त किया जाता है, लेकिन एम्बुलेंस देर से पहुंचती है। अब पोरसा चौराहे की यह तस्वीर सामने आने के बाद देरी के कारणों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों ने यह भी पूछा कि क्या यह सुविधा सभी जरूरतमंदों के लिए समान रूप से उपलब्ध है या फिर केवल विशेष लोगों को प्राथमिकता दी जाती है। यदि एम्बुलेंस का दुरुपयोग हो रहा है तो यह व्यवस्था पर गंभीर चोट है।
108 जैसी महत्वपूर्ण सेवा पर लोगों का भरोसा कायम रहना चाहिए। यदि समय पर एम्बुलेंस न पहुंचे या उसका दुरुपयोग हो, तो इसका सीधा असर मरीजों की जान पर पड़ता है। प्रशासन से अपेक्षा है कि वह मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के ठोस कदम उठाए।
यदि 108 एम्बुलेंस में मरीजों की बजाय सवारियां बैठाई जा रही हैं तो यह अत्यंत गंभीर मामला है। शासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
05 Mar 2026 10:55 am
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