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टेंडर हुए, शुरू नहीं हुई नहरों की सफाई, खुर्द बुर्द कर दी जाती है राशि

- अब गेहूं और सरसों में पलेवा के लिए 15 नवंबर तक छोड़ा जाएगा नहरों में पानी, सफाई के अभाव में रहता है फूटने का डर, पिछली साल भी कई जगह फूटी थी नहर

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मुरैना. जिले की निकली नहरों में पानी छोडऩे से पूर्व हर साल सफाई की जाती है। इसके लिए जल संसाधन विभाग टेंडर भी करता है। इस साल एबीसी व उससे निकली माइनरियों के लिए करीब 11 लाख का टेंडर 34 प्रतिशत ब्लो पर हुआ है। ऐसी स्थिति में नहरों की सफाई की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
जिले की सीमा से निकली मुरैना ब्रांच कैनाल, लोवर ब्रांच कैनाल, अंबाह ब्रांच कैनाल सहित कई छोटी छोटी माइनरियां व वितरिकाएं हैं जिनकी पानी आने से पूर्व सफाई होनी हैं। विभाग ने फिलहाल अंबाह ब्रांच कैनाल व उससे निकली माइनरियों की सफाई के लिए 11 लाख का टेंडर कर दिया है। बताया गया है कि टेंडर काफी कम रेट पर हुआ है इसलिए ठेकेदार यह कोशिश करेगा कि कम रेट की कैसे पूर्ति की जाए। ऊपर से अधिकारियों का कमीशन भी देना होगा। कई जगह तो नहर में पानी भरा है, ऐसी स्थिति में सफाई कैसे संभव है। विभाग को पहले पानी निकालना होगा, उसके बाद सफाई की जा सकती है। खबर है कि विभाग हर साल नहरों की सफाई व मरम्मत का ठेका करता है लेकिन ठेकेदार व विभागीय अधिकारियों की सांठगांठ के चलते बजट को खुर्द बुर्द कर दिया जाता है और सफाई व मरम्मत के नाम पर औपचारिकता पूरी की जाती है। अंबाह ब्रांच कैनाल पर सुखपुरा की पुलिया के पास माइनरी पर सफाई की गई हैं, यहां सिर्फ उसकी ऊपर के किनारे पर सफाई की है, अंदर नहीं की है जबकि अंदर सफाई होना जरूरी था। जबकि अंबाह ब्रांच कैनाल में सिकरौदा से सबलगढ़ तक कहीं भी सफाई का कार्य शुरू नहीं किया गया है।
शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
जल संसाधन विभाग की नंदपुरा सिचाई संथा के पूर्व अध्यक्ष रामेश्वर सिंह सिकरवार कलेक्टर सहित विभागीय अधिकारियों को जल संसाधन विभाग मुरैना द्वारा अंबाह ब्रांच कैनाल व अन्य शाखा नहरों की सफाई के नाम पर लाखों रुपए का बंदरवांट करने की शिकायत की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है। विभाग में गाडिय़ों के दुरुपयोग की भी शिकायत की गई थी।
कथन

  • पानी आने से पूर्व नहरों की सफाई की जाएगी। इसके लिए कार्यपालन यंत्री को निर्देशित किया जा रहा है। अगर सफाई में कोताही बरती गई तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।एस के वर्मा, मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग