
नियमों के फेर में फंसा अन्नदाता, तौल की समय सीमा बढ़ी, लेकिन नहीं खुले स्लॉट..मंडियों में समर्थन मूल्य से 300 से 400 रुपए प्रति क्विंटल तक कम भाव, पोर्टल लॉक होने से हजारों किसान परेशान
मुरैना. जिले में गेहूं खरीदी व्यवस्था किसानों के लिए राहत के बजाय नई मुसीबत बन गई है। शासन ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की अंतिम तिथि तो बढ़ा दी, लेकिन नए स्लॉट बुकिंग के लिए पोर्टल नहीं खोला। इसके चलते जिले के करीब 5 हजार किसान समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने से वंचित रह गए हैं। वर्तमान में खरीदी केंद्रों पर केवल उन्हीं किसानों का गेहूं तौला जा रहा है, जिनकी स्लॉट बुकिंग पहले से हो चुकी थी। स्थिति से परेशान किसानों ने जिला आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय पहुंचकर आवेदन दिए हैं, वहीं सैकड़ों किसानों ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई है। किसानों का आरोप है कि सरकार ने तिथि बढ़ाकर उम्मीद तो जगाई, लेकिन स्लॉट बंद रखकर उन्हें खुले बाजार के भरोसे छोड़ दिया।
जिले में इस बार 11153 किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया था। इनमें से 6,223 किसानों ने स्लॉट बुक कराया, जबकि अब तक 5,693 किसानों से खरीदी हो चुकी है। सर्वर की धीमी गति, सीमित समय और तकनीकी दिक्कतों के कारण हजारों किसान तय समय में स्लॉट बुक नहीं करा सके। किसानों का कहना है कि 01 मई के बाद नया एक भी स्लॉट जारी नहीं किया गया। ऐसे में जिन किसानों के स्लॉट नहीं खुले, उन्हें मजबूरी में व्यापारियों को कम कीमत पर गेहूं बेचना पड़ रहा है। मंडियों में समर्थन मूल्य से 300 से 400 रुपए प्रति क्विंटल तक कम भाव मिलने के बावजूद किसान नकद भुगतान और तत्काल बिक्री के कारण वहीं फसल बेच रहे हैं। किसानों का आरोप है कि खरीदी केंद्रों की ऑनलाइन प्रक्रिया ग्रामीण किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गई है। कई किसान तकनीकी जानकारी और इंटरनेट सुविधा के अभाव में समय पर स्लॉट बुक नहीं करा सके।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक 5 लाख क्विंटल से अधिक गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। लक्ष्य पूरा होने के बाद अब प्रशासन भी सुस्त नजर आ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में केवल उन्हीं किसानों का गेहूं तौला जा रहा है, जिनके स्लॉट पहले से बुक हैं। ऐसे में बिना स्लॉट वाले किसानों को औने-पौने दामों में मंडियों के व्यापारियों को फसल बेचनी पड़ रही है।
प्रदेश में जहां कई जिलों के किसान समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए खरीदी केंद्रों पर ट्रॉलियां लेकर इंतजार कर रहे हैं, वहीं मुरैना जिले में हजारों किसानों ने सरकारी खरीदी से दूरी बना ली। किसानों ने समर्थन मूल्य से 300 से 400 रुपए प्रति क्विंटल कम भाव मिलने के बावजूद खुले बाजार में अपनी उपज बेच दी। इसकी सबसे बड़ी वजह सहकारी कर्ज की स्वचालित कटौती रही।
किसानों के अनुसार खरीदी केंद्र में गेहूं की तौल ऑनलाइन दर्ज होने के साथ ही बकाया ऋण की 50 फीसदी राशि खाते से स्वत: समायोजित हो जाती है। भुगतान पर्ची में कटौती का पूरा विवरण भी दर्ज रहता है। यही प्रक्रिया किसानों की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है।
11153 किसानों ने कराया पंजीयन
6,223 किसानों ने कराया स्लॉट बुक
5,693 किसानों से हुई खरीदी
5 लाख क्विंटल से अधिक गेहूं खरीदा गया
करीब 5 हजार किसान अब भी समर्थन मूल्य से बाहर
31,164 किसानों पर कृषि ऋण बकाया
कुल बकाया करीब 106 करोड़ रुपए
16,830 किसान घोषित डिफॉल्टर
डिफॉल्टर किसानों से 14 प्रतिशत तक ब्याज वसूली
स्लॉट बुकिंग के लिए किसानों के आवेदन प्राप्त हुए हैं। सभी आवेदन शासन स्तर पर भेज दिए गए हैं। नए स्लॉट खोलने का निर्णय शासन स्तर से ही होगा।
सरकार किसानों को शून्य ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध करा रही है, लेकिन कई किसान समय पर कर्ज नहीं चुका रहे। इसी वजह से वे डिफॉल्टर हो रहे हैं। नियमानुसार बकाया ऋण की कटौती की जाती है।
Published on:
28 May 2026 10:01 am
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