
Movie Review Of Dhanak
कलाकारः हेतल गढा, कृष छाबरिया, राजीव लक्ष्मण, विभा छिब्बर, विपिन शर्मा
निर्देशकः नागेश कुकूनुर
मूवी टाइपः ड्रामा
अवधिः 2 घंटा
मुंबई। एक तरफ जहां बड़ी बजट की फिल्मों का बोलबाला है वहां छोटे बजट की साफ छवि की फिल्मों का बनाना एक मुश्किल भरा काम है। मुश्किल फिल्म बनाने में नहीं है पर उसे रिलीज करने और सिनेमा हॉल तक ले जाने की कशमकश किसी लड़ाई से कम नहीं है।
इस शुक्रवार को एक तरफ जहां विवादों के वजह से चर्चा में रही मल्टीस्टारर फिल्म रिलीज हुई। वहीं दूसरी तरफ एक छोटे बजट की फिल्म भी रिलीज हुई है जिसका नाम धनक है।
फिल्म 'धनक' की कहानी एक 8 साल के नेत्रहीन लड़के छोटू और उसकी 10 साल की बहन परी की है, जो अपने भाई के 9वें जन्मदिन से पहले उसके आंखों की रोशनी वापस दिलाना चाहती है। इसके लिए वह शाहरुख खान से मिलना चाहती है, क्योंकि नेत्रदान की अपील करते हुए परी ने शाहरुख को पोस्टर में देखा है और फिर परी शाहरुख से मिलने अपने भाई को लेकर सफ़र पर निकल पड़ती है।
हर चीज में दिखती है खूबसूरती
फिल्म 'धनक' की कहानी बसी है राजस्थान में और खास बात यह है कि लेखक और निर्देशक नागेश कुकुनूर ने पर्दे पर कहानी कहने के साथ-साथ राजस्थान की सुंदरता को अच्छे से दर्शाया है फिर वो चाहे रात के हलके अंधेरे में खड़े पेड़ की सुंदरता हो या दिन की धूप में रेतीले पहाड़ों की सुंदरता, हर चीज़ को खूबसूरती से दिखाया है।
भाई-बहन की नोकझोंक
फिल्म में भाई-बहन का एक दूसरे के लिए प्यार है, आंखों की रोशनी हासिल करने की हिम्मत है और राजस्थान का बेहतरीन संगीत है। अच्छे संवाद हैं जो भाई-बहन की नोकझोंक सुनकर होंठो पर मुस्कुराहट बिखेरते हैं। साथ ही भाई बहन के रोल को कृष छाबरिया और हेतल गाड़ा ने अच्छे से निभाया है।
भाई-बहन के रोल को जीवंत कर दिया है हेतल गढा और कृष छाबरिया ने
पूरी फिल्म भाई-बहन के लीड किरदारों के आसपास घूमती है। इन लीड किरदारों में हेतल गढा और कृष छाबरिया ने बेहतरीन ऐक्टिंग की है, इन दोनों बाल कलाकारों की तारीफ करनी होगी कि इन्होंने अपने जीवंत अभिनय से इन किरदारों में जान डाल दी। अन्य कलाकारों में सुरेश मेनन, विभा छिब्बर, संजना सिंह अपने अपने किरदार में फिट है।
नागेश कुकूनूर एक बार फिर छाप छोड़ने में रहे कामयाब
नागेश कुकूनूर ने एक बार फिर अपने मिजाज की ऐसी फिल्म बनाई है जो उनके फैंस की कसौटी पर यकीनन खरा उतरने का दम रखती है। नागेश ने इस फिल्म में कभी उम्मीद का दामन ना छोड़ने का सार्थक मैसेज बडी सरलता के साथ दिया है। इस फिल्म में नागेश ने स्क्रिप्ट के साथ कहीं छेड़छाड़ नहीं की तो वहीं बॉक्स ऑफिस का मोह छोड़ पूरी ईमानदारी के साथ ऐसी फिल्म बनाई जिसे रिलीज के पहले दिन से ही टैक्स फ्री होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राजस्थान की नयनाभिराम लोकेशन इस फिल्म का प्लस पॉइंट है।
Published on:
17 Jun 2016 04:01 pm
बड़ी खबरें
View Allमूवी रिव्यू
मनोरंजन
ट्रेंडिंग
