यह अत्यंत ही कठिन व्रत माना जाता है। इस में महिलाएं सुबह से दूसरे दिन तक पानी भी ग्रहण नहीं करती हैं और रतजगा भी करती हैं। व्रत रखने वाली अधिकतर महिलाएं कुछ भी ठोस खाना नहीं पसंद करती हैं। कुछ महिलाएं इस दिन बिल्कुल भी पानी ग्रहण नहीं करती हैं। इस व्रत में सुबह स्नान के बाद भगवान शिव-पार्वती की पूजा का महत्व है। पूरे दिन भजन गाया जाता है और हरतालिका व्रत की कथा सुनाई जाती है। कुछ राज्यों में महिलाएं पार्वतीजी की पूजा करने के पश्चात लाल मिट्टी से स्नान करती हैं। मान्यता के मुताबिक ऐसा करने से महिलाएं पूरी तरह से शुद्ध मानी जाती हैं। कुछ स्थानों पर झूला झूलने की भी परंपरा है। यह व्रत महिलाओं के विवाह से भी जुडा़ होता है, इसलिए इसे अत्यंत शिद्दत के साथ किया जाता है।