
badi khermai mandir
जबलपुर। वैसे देश प्रदेश और शहर में ऐसे सैकड़ों मठ मंदिर मिल जाएंगे जिनका अपना इतिहास और आस्था की वजह है, लेकिन जबलपुर की बड़ी खेरमाई माता का मंदिर न केवल अपने आप में आस्था का प्रमुख केन्द्र है, बल्कि इसका इतिहास भी बहुत रोचक बताया जाता है। नवरात्र पर यहां हजारों की संख्या में लोग सुबह से देर रात तक पहुंचते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इसका इतिहास कल्चुरी काल यानि करीब 800 साल पुराना है। गोंड शासन काल के दौरान जब मुगल सेना ने उन्हें परास्त कर दिया तो वे यहां आकर रूके और शिला रूपी देवी का पूजन किया। पूजन के बाद उन्होंने दोबारा मुगलों से युद्ध लड़ा और विजयी हुए। वहीं 500 वर्ष पूर्व गोंड राजा संग्राम शाह ने यहां प्रतिमा की स्थापना कर मढिय़ा बनवाई थी। शहर की सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां बड़ी खेरमाई को मां दुर्गा की गुप्त शक्तिपीठों में भी माना जाता है।
बड़ी खेरमाई मंदिर जबलपुर की प्रमुख ग्राम देवी के रूप में पूजी जाती हैं, आज भी साधकों की लगती है कतार
तंत्र साधना स्थली रही
इतिहासकारों के अनुसार गांव खेड़ों की पूज्य देवी को खेड़ा कहा जाता था, जो कि बोल चाल की भाषा में अब खेरमाई कहलाने लगा है। बड़ी खेरमाई का पूजन आज भी ग्राम देवी के रूप में किया जाता है। एक समय यहां बलि प्रथा भी होती थी, तंत्र विद्या के लिए बड़े बड़े साधक आते थे। वहीं पूरे मंदिर परिसर में आधा सैकड़ा मंदिर हैं जो किसी ने किसी तंत्र पूजा से जुड़े हैं।
सोमनाथ की तर्ज पर नया मंदिर
पुराना मंदिर समय के साथ जर्जर व छोटा पडऩे लगा था, जिसके बाद प्रबंधन समिति ने यहां सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर नया मंदिर बनवाया है। सबसे बड़ी बात ये कि बिना गर्भगृह की प्रतिमाओं हटाए करीब ढाई साल में नए मंदिर का निर्माण कराया गया है। इसकी खासियत है कि ये सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर बना है। इसमें कहीं पर लोहा सरिया का उपयोग नहीं किया गया है। इसका निर्माण गुजरात के रहने वाले उसी सोमपुरा परिवार ने किया है जिसने सोमनाथ मंदिर बनाया है और अभी राम मंदिर अयोध्या का निर्माण कर रहे हैं। पूरा मंदिर पत्थरों की लॉकिंग सिस्टम से खड़ा किया गया है।
Updated on:
06 Apr 2022 02:45 pm
Published on:
06 Apr 2022 12:34 pm
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