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बीएमसी का बड़ा फैसला, नालों से बनाएगी सोलर एनर्जी; बदबू से भी मिलेगा छुटकारा

बीएमसी ने बड़ा फैसला लिया हैं। मुंबई में नालों के ऊपर सोलर एनर्जी पैनल लगाने का फैसला किया हैं। इससे एक तरफ जहां बिजली पैदा की जा सकेगी तो वहीं दूसरी ओर बदबू की प्रॉब्लम से भी छूटकारा मिलेगा। बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट को करीब 6 साल पहले प्रस्तावित किया गया था।

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मुंबई के सैकड़ों नालों के ऊपर बीएमसी सोलर पैनल लगाकर बिजली पैदा करने की योजना तैयार कर रही है। इस काम को बीएमसी सीएसआर फंड से करेगी। इसके साथ ही इन नालों को स्लैब से ढकने की भी योजना है। इससे अब लोग नालों में कचरा नहीं डाल पाएंगे और बारिश के दिनों में महानगरवासियों को बाढ़ जैसी स्थिति से छूटकारा मिल जाएगा। मुंबई में 309 बड़े नाले हैं, इनकी लंबाई लगभग 290 किलोमीटर है। इसके साथ ही 508 छोटे नाले हैं, जिनकी लंबाई 605 किलोमीटर है।

बीएमसी के इस फैसले से एक तरफ जहां बिजली पैदा की जा सकेगी तो वहीं दूसरी ओर बदबू की समस्या से भी छूटकारा मिल जाएगा। इस प्रोजेक्ट को करीब 6 साल पहले प्रस्तावित किया गया था, जिसे अब जाकर ग्रीन सिग्नल मिला है। यह भी पढ़े: गौतम अडानी ग्रुप को मिला धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट, 5 हजार करोड़ की लगाई थी बोली

इन प्रमुख नालों में एसएनडीटी नाला, गजधर नाला, कोल डोंगरी, मोगरा नाला, मीठीबाई नाला, जेवीपीडी नाला, वर्सोवा मोगरा, शास्त्री नगर, भगत सिंह नगर नाला शामिल हैं। इस संबंध में बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि नालों पर सोलर प्लांट लगाने की योजना का प्रस्ताव काफी पहले तय किया गया था। नालों पर सोलर पैनल लगाने के लिए उन पर आरसीसी स्लैब की योजना बनाई गई है। इसके लिए चैरिटेबल ऑर्गनाइजेशन, सोसायटियों, बीएमसी के विभिन्न विभागों, सरकारी इमारतों, प्राइवेट भूखंड धारकों, शैक्षणिक संस्थानों व अन्य प्राधिकरणों की मदद से सोलर पैनल लगाने की योजना है।

बता दें कि सोलर पैनल से मिलने वाली एनर्जी इन्हीं संस्थाओं को उपलब्ध कराई जाएगी। बीएमसी अधिकारी ने बताया कि नवंबर 2016 में तत्कालीन नगरसेवक दिलीप पटेल ने यह प्रस्ताव रखा था। 6 साल पहले दिए गए प्रस्ताव में कहा गया था कि इन खुले नालों के आसपास में काफी संख्या में लोग रहते हैं। इन्हें दुर्गंध का सामना करना पड़ता है।

बीएमसी अधिकारी ने आगे बताया कि नालों में कचरा फेंकने की वजह से बारिश के दौरान आसपास के इलाके डूब जाते हैं। अगर इन छोटे और बड़े नालों पर सोलर पैनल लगाए जाएं, तो बदबू की भी समस्या दूर हो जाएगी और ग्रीन एनर्जी भी बनेगी। अधिकारी ने जानकारी दी कि इस प्रस्ताव पर दो बार बैठक भी हो चूकि हैं। जिसके बाद इसे इजाजत मिल गई।