
कोरोना का खतरा टालने के लिए मनपा ने वरिष्ठ नागरिकों को ढूंढना शुरू किया,कोरोना का खतरा टालने के लिए मनपा ने वरिष्ठ नागरिकों को ढूंढना शुरू किया
मुंबई.कोरोना वायरस का सबसे अधिक खतरा वरिष्ठ नागरिकों को है। इसलिए उनका स्वतंत्र सर्वेक्षण करने का निर्णय मुंबई मनपा ने लिया है। सर्वेक्षण के दौरान जरूरत पड़ने पर उनके शरीर के ऑक्सीजन के स्तर का मापन ऑक्सी मीटर से किया जाएगा। कम होने पर ऑक्सीजन थेरेपी का उपयोग किया जाएगा। आक्सीजन स्तर 95 प्रतिशत से कम होने पर मनपा के नॉन कोरोना अस्पताल में भर्ती कर इनका इलाज किया जाएगा।
बता दें कि मुंबई में 3 हजार 445 मरीज पाए गए हैं। उसमें से 408 मरीज ठीक हो चुके हैं। विभिन्न अस्पतालों में भर्ती 2 हजार 882 मरीजों का इलाज जारी है। अब तक 150 लोगों की मौत हो चुकी है। जिन कोरोना पीड़ित मरीजों की मौत हुई है,उसमें वरिष्ठ नागरिकों की संख्या अधिक है। वरिष्ठ नागरिकों को मधुमेह, ब्लड प्रेशर, सांस लेने की तकलीफ, मूत्रपिंड की समस्या, थायराइड और दमा आजार, दमा की समस्या रहती है। इसलिए वरिष्ठ नागरिकों को कोरोना का खतरा अधिक रहता है। इन पर ध्यान देना जरूरी है। ऐसे वरिष्ठ नागरिकों का स्वास्थ्य और मेडिकल के दृष्टिकोण से एक विशेष सर्वेक्षण मनपा ने शुरू किया है। इसमें प्रमुख रूप से अनियंत्रित मधुमेह, अनियंत्रित ब्लडप्रेशर, कैंसर, अनियंत्रित दमा, मूत्रपिंड की समस्या, थायराइड की समस्या और सांस की तकलीफ वाले वरिष्ठ नागरिकों का पंजीकरण प्रमुखता से किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर उनका इलाज किया जाएगा।
मनपा के सभी स्वास्थ्य केंद्र (हेल्थ पोस्ट) परिसर के वरिष्ठ नागरिकों का सर्वेक्षण किया जाएगा। इस सर्वेक्षण के लिए प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र के तहत एक टीम का गठन किया गया है। इस टीम में 2 कम्युनिटी हेल्थ वर्कर' व 'आशा वर्कर' रहेंगे। साथ ही आवश्यकता और उपलब्धता के अनुसार राष्ट्रीय सेवा योजना (एन एस एस) के स्वयंसेवकों की मदद ली जाएगी।
गौरतलब है कि मनपा के कुछ उपनगरीय अस्पतालों को नॉन कोरोना अस्पताल के रूप में घोषित किया गया है। इसमें सांताक्रूज पूर्व परिसर में स्थित विष्णुप्रसाद नंदराय देसाई अस्पताल, मालाड पूर्व स्थित सदाशिव कानोजी पाटिल अस्पताल, बोरिवली पूर्व स्थित क्रांति ज्योति सावित्रीबाई फुले अस्पताल , विक्रोली का क्रांतिवीर महात्मा जोतिबा फुले अस्पताल, मुलुंड पूर्व स्थित स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर आदि अस्पताल हैं। इन अस्पतालों में तकरीबन 300 बेड नॉन कोरोना मरीजों के लिए है। जे.जे. अस्पताल में 100 बेड नॉन कोरोना मरीजों के लिए रखा गया है। इसके अलावा निजी अस्पतालों के धर्मादाय बेड का उपयोग भी इन मरीजों के लिए किया जा सकता है।
Published on:
22 Apr 2020 06:12 pm
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