
Bombay High Court
Mumbai-Goa Highway: बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने सोमवार को राष्ट्रीय राजमार्ग 66 (National Highway 66) के एक खंड की खराब स्थिति के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की खिंचाई की।
चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता (Dipankar Datta) और जस्टिस अभय आहूजा (Abhay Ahuja) की खंडपीठ ने NHAI (National Highway Authority of India) को एनएच-66 (NH-66) के मुंबई-गोवा (Mumbai-Goa Highway) हिस्से के पनवेल (Panvel) से इंदापुर (Indapur) तक के सभी गड्ढों को भरने और 23 दिसंबर 2022 तक हलफनामा दाखिल कर अनुपालन की स्थिति बताने का निर्देश दिया है। यह भी पढ़े-Maharashtra: ‘गुजरात चुनाव में वोट डालने के लिए दें छुट्टी, वर्ना होगी कार्रवाई’, शिंदे सरकार का निजी कंपनियों को आदेश
जस्टिस दत्ता ने आदेश में कहा, "चूंकि कोर्ट से गड्ढों की मरम्मत के लिए कोई सकारात्मक निर्देश नहीं मिला है, अगर तस्वीरों पर विश्वास किया जाए तो ऐसा लगता है कि एनएचएआई ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया है।" मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि तस्वीरों के साथ याचिकाकर्ता का हलफनामा पनवेल से इंदापुर के बीच एनएच-66 की "गंभीर तस्वीर" को दिखाता है।
बॉम्बे कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को एनएच-66 के मुंबई-गोवा हिस्से पर काम करने के लिए सही दिशा में आगे बढ़ने और सुनवाई की अगली तारीख तक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह टिप्पणी मुंबई-गोवा हाईवे के पुनर्निर्माण को पूरा करने में लगने वाले लंबे समय के संबंध में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 अक्टूबर 2022 को एनएचएआई को एनएच-66 के पनवेल से इंदापुर खंड पर आवश्यक मरम्मत करने का निर्देश दिया था, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना को रोका जा सके। साथ ही कहा था कि अगर सड़क की खराब स्थिति के कारण दुर्घटना होती है, तो इससे सख्ती से निपटा जाएगा। कोर्ट अब इस मामले की आगे की सुनवाई 4 जनवरी 2023 को करेगी।
Published on:
22 Nov 2022 11:40 am
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