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Chhatrapati Sambhajinagar : ‘दादा, अब राखी पर किसे फोन करूं?’ अस्पताल में तीनों के शव देखकर फूट-फूटकर रोई कुणाल की बुआ

Sambhajinagar Khawadya hill suicide: छत्रपति संभाजीनगर के पहाड़ी पर इकलौते बेटे को बचाने में माता-पिता की भी जान चली गई। घाटी अस्पताल में भाई का शव देखकर बिलखती बहन ने कहा- 'दादा, 10 दिन बाद राखी है, अब किसे कॉल करूंगी?'
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मुंबई

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Imran Ansari

Aug 22, 2026

Chhatrapati Sambhajinagar

अस्पताल में तीनों के शव देखकर फूट-फूटकर रोई कुणाल की बुआ

Kunal Chandwade family suicide: छत्रपति संभाजीनगर के तिसगांव क्षेत्र स्थित पहाड़ी पर शुक्रवार को घटित दिल दहला देने वाले हादसे ने हर किसी को सुन्न कर दिया है। अपने इकलौते बेटे को मौत के मुंह से खींचने की कोशिश में माता-पिता की भी जान चली गई और पूरा चांदवडे परिवार एक झटके में खत्म हो गया। शनिवार को जब पोस्टमार्टम के बाद तीनों शवों को घाटी सरकारी अस्पताल में लाया गया, तो परिजनों और रिश्तेदारों के आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मृतक मुरलीधर चांदवडे की बहन का चीत्कार सुनकर अस्पताल परिसर में मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।

'10 दिन बाद पौर्णिमा है, राखी पर किसे फोन करूंगी?'

मृतक मुरलीधर चांदवडे की तीन बहनें हैं। करीब पांच महीने पहले परिवार में एक भांजे की शादी हुई थी, जिसमें किसी कारणवश मुरलीधर शामिल नहीं हो सके थे। तब से भाई-बहनों की मुलाकात नहीं हो पाई थी। अभी कुछ ही दिनों पहले बहन और भांजे से फोन पर जल्द मिलने की बात हुई थी।

लेकिन उस मुलाकात से पहले ही शुक्रवार को एक साथ भाई, भाभी और भतीजे की मौत की खबर आ पहुंची। घाटी अस्पताल में जब बहन ने अपने भाई मुरलीधर का शव देखा, तो वह खुद पर काबू न रख सकी। अस्पताल की दीवारों से टकराती उसकी आर्त पुकार थी। दादा, अब 10 दिन बाद राखी पौर्णिमा है, मैं राखी बांधने के लिए किसे कॉल करूंगी रे?" इस मार्मिक सवाल ने वहां मौजूद हर इंसान का कलेजा चीर दिया।

मां का कांपता कलेजा

घटना के वक्त पहाड़ी की चोटी पर जो कुछ हुआ, उसकी बानगी भी रुला देने वाली है। शुक्रवार सुबह 10 बजे पिता से विवाद के बाद 18 वर्षीय कुणाल खवड्या पहाड़ी पर जा चढ़ा था। पुलिस, दमकल विभाग और ग्रामीण उसे करीब 3 घंटे तक मनाते रहे। उसकी मां संगीता देवी ने बेटे के सामने हाथ जोड़कर और रो-रोकर कहा कि 'बेटा, तेरी अपने पापा से अनबन है ना? ये देख, मैं अभी अपना मंगलसूत्र उतारकर फेंक देती हूं। तेरे पापा को छोड़ दूंगी, सिर्फ तेरे साथ रहूंगी, लेकिन तू मुझे छोड़कर मत जा!' मां की इस दर्दभरी गुहार पर हताश कुणाल ने सिर्फ इतना कहा- 'मम्मी, मेरी बात कोई नहीं सुनता। अब मुझे जीने में कोई दिलचस्पी नहीं है और मेरे पास कोई हल नहीं बचा है।'

और पल भर में तबाह हो गया परिवार

इसके तुरंत बाद कुणाल ने पहाड़ी से छलांग लगा दी। पास ही खड़े पिता मुरलीधर ने उसे लपककर बचाने की कोशिश की, लेकिन दोनों का संतुलन बिगड़ा और वे सैकड़ों फीट गहरी खाई में जा गिरे। अपनी आंखों के सामने पति और बेटे को गिरते देख मां संगीता ने भी उसी पल नीचे छलांग लगा दी।