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शर्मनाक: खड्डे ने ली डेढ़ साल के बच्चे की जान

शर्मनाक: खड्डे ने ली डेढ़ साल के बच्चे की जान नेरूल जिमखाना के पास पानी में डूबा मासूमखेलते-खेलते खड्डे में गिर पड़ा मासूम, तीन घंटे बाद मिला शव  

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शर्मनाक: खड्डे ने ली डेढ़ साल के बच्चे की जान

शर्मनाक: खड्डे ने ली डेढ़ साल के बच्चे की जान

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मुंबई. नवी मुंबई के नेरुल स्थित नेरुल जिमखाना के पास पानी भरे एक खड्डे में डूबने से डेढ़ साल के मासूम की मौत हो गई। यह घटना रविवार दोपहर की है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर प्राथमिक मामला दर्ज किया है। नेरुल जिमखाना के पास एक बड़ा खड्डा है, जिसमें पानी भरा हुआ है। इसमें डूबने से डेढ़ साल के आर्यन अंसारी की मौत हो गई।

अपनी मां के साथ आया था आर्यन

मिली जानकारी अनुसार रविवार सुबह आर्यन अपनी मां के साथ आया था। खेलते-खेलते वह खड्डे के पास पहुंच गया और फिसल कर उसमें गिर पड़ा। पानी में डूबने से उसकी मौत हो गई। जब काफी समय तक आर्यन कहीं नजर नहीं आया, तब उसकी तलाश शुरू हुई। लगभग तीन घंटे बाद आर्यन पानी में दिखा। इसके बाद पुलिस ने आर्यन को पालिका अस्पताल में भर्ती कराया। जांच के बाद डॉक्टरों न उसे मृत घोषित कर दिया।

बांग्लादेशियों का कब्जा
नेरुल जिमखाना के पास, जहां इस बच्चे की डूबने से मौत हुई, उस जगह पर पहले अवैध रूप से मस्जिद बनाई गई थी। मस्जिद तो हटा दी गई है, मगर खाली हुई जगह पर अवैध झोपड़े बन गए हैं। इन झोपड़ों में ज्यादातर बांग्लादेशी रहते हैं। इन बांग्लादेशियों को एक स्थानीय नेता का समर्थन है, जिन्हें वोट बैंक के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।


सड़क हादसे में भाई-बहन जख्मी, हालत गंभीर
भिवंडी . खड्डों के कारण शहर में अमूमन हर दिन सड़क हादसे हो रहे हैं। रविवार को सुबह 11 बजे शांतिनगर पुलिस स्टेशन के पास ब्रिज के नीचे गड्ढे में गिरने से भादवड निवासी बाइक सवार युवक रोहन दिलीप पाटील और उसकी बहन लावण्या पाटील गंभीर रूप से घायल हो गए। भाई-बहन को उपचार के लिए एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
विदित हो कि भिवंडी-कल्याण रोड पर पिछले चार साल से जेएमसी कंपनी फ्लाईओवर बना रही है। फ्लाईओवर निर्माण व भारी बरसात के चलते इस रोड पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। बार-बार की जा रही शिकायत के बावजूद मनपा प्रशासन सड़क को दुरुस्त नहीं करवा रहा है। इस कारण अमूमन रोज ही हादसे हो रहे हैं।

तय हो जवाबदेही
मुंबई, ठाणे और पालघर जिलों में सड़कों पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। कई जगह तो गड्ढों के कारण पैदल चलना भी मुश्किल है। इस तरह के हादसों के लिए स्थानीय प्रशासन को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। आम लोगों की शिकायतों के समाधान की समय सीमा तय का जानी चाहिए। समय पर शिकायतों का समाधान नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।