
mumbai dharm news: शिरडी वाले साईंबाबा आया है तेरे दर पे सवाली
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
शिरडी. क्रिसमस के मौके पर सर्व धर्म समभाव के प्रतीक शिरडी के साईंबाबा के चरणों में साई भक्तों ने बड़ी संख्या में हाजिरी लगाई। लाखों साई भक्त शिरडी आते हंै। नए साल का स्वागत करने के लिए भक्त बड़ी मात्रा में शिरडी आते है। बुधवार को शिरडी में क्रिसमस पर देश और विदेशों से साई भक्त शिरडी में दाखिल हुए।
क्रिसमस पर उमड़ा भक्तों का प्यार
गौरतलब है कि भारत की पावन धरती पर कई सिद्ध संतों ने जन्म लिया है। ऐसे ही ‘शिरडी के साईं बाबा’। जिनकी गुरुवार के दिन विशेष रूप से साधना-आराधना की जाती है। साईं बाबा ने अपने जीवन में कई चमत्कार किए हैं। ऐसे में हर मजहब के लोग अपनी मनोकामना को पूरा करने के लिए उनकी शरण में पहुंचते हैं। साईं बाबा के भक्त उन्हें ईश्वर का अवतार मानते हैं। बाबा के भक्तों का मानना है कि गुरुवार के दिन पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करने पर साईं की कृपा जरूर बरसती है। २५ दिसंबर को बड़ी संख्या में भक्तों ने दर्शन किए
सूर्य ग्रहण के दौरान बरतें सावधानियां
मुंबई. 26 दिसंबर को सूर्य ग्रहण होने वाला है। इस ग्रहण पर पूरे देश व दुनिया के हर आम व खास की निगाहें हैं। यह ऐसी खगोलीय घटना है जिससे धर्म और विज्ञान दोनों जुड़े हैं और दोनों की मान्यताएं इससे संचालित होती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में सोने, खाने से लेकर अन्य कामों को लेकर दिनचर्या कैसी होना चाहिये। ग्रहण के दौरान नींद में रहने वालों के घर एवं व्यापार में प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस दौरान यदि कोई व्यक्ति शरीर पर सुंगधित इत्र, तेल या परफ्यूम का छिडक़ाव करता है तो उसे त्वचा के रोग होने का डर रहता है। ग्रहण के सूतक के दौरान भोजन करना निषेध है। यदि आवश्यक है तो इस बात का पूरा ध्यान रखें कि स्वच्छता व पवित्रता भंग ना हो। ग्रहण काल आरंभ होने एवं समाप्त होने के बाद संभव हो तो शुद्ध जल से स्नान करें। यह जल गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कावेरी, मानसरोवर, तापी, बिंदु सरोवर आदि धार्मिक दृष्टि से पवित्र नदियों व जल संरचना का होना चाहिये।
सूर्य ग्रहण को लेकर सबके अपने मत हैं, विचार हैं, अनुमान हैं, कहीं रोमांच है तो कहीं जिज्ञासा। सूर्य ग्रहण एक विराट घटना है जो सृष्टि को आंदोलित व समाज को प्रभावित करती है। विश्व में यह ग्रहण यूरोप, हिन्द महासागर में नजऱ आएगा। भारत में यह खंडग्रास रूप में दिखाई देगा। दक्षिण के कुछ प्रांतों में यह वलय आकार का दिखाई देगा, जबकि शेष राज्यों में इसे आंशिक रूप से ही देखा जा सकेगा। इस ग्रहण को लेकर खास बात यह है कि यह कंकण आकृति का होगा। यह संयोग 144 साल बाद आ रहा है।
Published on:
25 Dec 2019 10:27 pm
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