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पशुओं को लंपी रोग से बचाने में कारगर है गो-मूत्र

स्वस्थ गाय के मूत्र से बढ़ती है संक्रमित मवेशियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता

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मृत गायों को लावारिस छोड़ने पर होगी कार्रवाई

मृत गायों को लावारिस छोड़ने पर होगी कार्रवाई

नागपुर के गौ विज्ञान रिसर्च सेंटर का दावा
नागपुर. पशुओं को लंपी रोग से बचाने की जद्दोजहद के बीच नागपुर के गो-विज्ञान अनुसंधान केंद्र ने चौंकानेवाला दावा किया है। केंद्र ने गो-मूत्र से लंपी संक्रमित मवेशियों को ठीक करने का दावा किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि स्वस्थ गाय का मूत्र देने से संक्रमित पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इससे पशु लंपी संक्रमण को मात दे देते हैं। केंद्र की डॉ. नंदिनी भोजराज ने बताया कि देवलापार में 650 पशु हैं। इनमें 20 से 25 जानवरों में लंपी संक्रमण के लक्षण थे। गो-मूत्र से वे स्वस्थ हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के विदर्भ के अन्य क्षेत्रों में भी लंपी संक्रमित जानवर गो-मूत्र से ठीक किए गए हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात सहित कई राज्यों में लंपी का प्रकोप है। हजारों पशु दम तोड़ चुके हैं। इससे बचाव के लिए मवेशियों को टीका लगाया जा रहा है। अकेले महाराष्ट्र में लगभग 48 लाख पशुओं को टीका लगाया गया है।

यह तरीका अपनाया
डॉ. भोजराज ने बताया कि हमने लंपी संक्रमित जानवरों को ज्यादा से ज्यादा मात्रा में गोमूत्र दिया। गुलवेल, हल्दी, अर्जुन (अजान), अडुलसा और नीम का मिश्रण भी पशुओं को दिया गया। गोशाला में साफ-सफाई रखी गई। मच्छरों से बचाव के उपाय किए गए। नतीजा सकारात्मक रहा।

नैदानिक गुण
उन्होंने बताया कि गो-मूत्र में आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, खनिज यौगिक, कार्बोनिक एसिड, पोटाश, नाइट्रोजन, अमोनिया, मैंगनीज, सल्फर, फॉस्फेट, पोटैशियम, यूरिया, यूरिक एसिड, एंजाइम, साइटोकिन्स, लैक्टोज आदि होते हैं। साइक्लोकिंस और अमीनो एसिड एक निवारक भूमिका निभाते हैं। इससे तैयार मिश्रण में नैदानिक गुण हैं।

उबाल कर सेवन
केंद्र के संयोजक सुनील मानसिंहका ने बताया कि गो-मूत्र इकट्ठा करने के बाद उबाला जाता है। इसके बाद लंपी संक्रमित मवेशियों को 100 मिली लीटर और बछड़ों को 50 मिली गो-मूत्र दिया गया। शोध से स्पष्ट है कि गो-मूत्र में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट प्रभावी होते हैं। गो-मूत्र का प्रयोग केवल महाराष्ट्र ही नहीं हरियाणा व राजस्थान में भी किया जाता है।

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