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पराई बेटी का शादी करवाना पुण्य का काम

स्वामी हरिश्वरानंद चेरिटेबल ट्रस्ट मुंबई में 19 साल से करवा रहा सामूहिक विवाहहरिश्वरानंद सरस्वती ने कहा, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ पर जोर

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पराई बेटी का शादी करवाना पुण्य का काम

सुभाष गिरि/मुंबई. मुंबई में एक ऐसी सामाजिक संस्था है, जो 19 साल से सामूहिक विवाह करवा रही है, जिसका नाम है स्वामी हरिश्वरानंद चेरिटेबल ट्रस्ट। यह ट्रस्ट अब तक 400 से ज्यादा जिदंगियों को हमराह बना चुका है। वे सभी लोग अपनी जिंदगी खुशी-खुशी से जी रहे हैं। ट्रस्ट के प्रमुख मार्गदर्शक परमहंस स्वामी हरिश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि एक पिता के लिए अपनी बेटी का विवाह आज के दौर में बहुत कठिन होता जा रहा है। ऐसे में सर्वधर्म समभाव सामूहिक विवाह गरीब परिवारों के लिए बहुत बड़ा सहारा है। ट्रस्ट एक आयोजन के तहत हर साल धूमधाम से लाचार और मजबूर जोड़ों की शादियां करवाता है, ताकि उन्हें अपनी मजबूरी का किसी प्रकार का दर्द न हो, जोड़ों को कपड़े, गहने भी प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को बढ़ावा देने की जरूरत है। अपनी बेटी का विवाह तो सभी करवाते हैं, परन्तु पराई बेटी का विवाह करवाना सबसे बड़ी सेवा और पुण्य का कार्य है। सामूहिक विवाह आज समाज की आवयश्कता है। कन्याओं का विवाह करवाना पुण्य का कार्य है इससे बड़ी सेवा नही हो सकती। ऐसे आयोजन में सामाजिक संगठनों और समाज सेवियों को आगे आना चाहिए।
समाज का हमेशा भला चाहते हैं संत
हरिस्वरानंद सरस्वती ने कहा कि संत का जीवन पांच लक्षणों से परिपूर्ण होता है। साधु का चरित्र कपास के समान होता है, जो भक्ति को प्रकट करा दे। नारद जी के माध्यम से श्रीमद्भागवत कथा का निर्माण हुआ। सत्य स्वरूप में भगवान को मानकर यदि कथा का श्रवण किया जाए, तो निश्चित ही वह कथा फलदाई होती है। संसार में बहुत कम लोग पाए जाते हैं, जो समाज व संसार का भला चाहते हैं। जो संसार का भला चाहता हो, वह व्यक्ति संत होता है।
चित्र की अपेक्षा चरित्र की सुंदरता पर ध्यान दें
उन्होंने कहा कि चित्र नश्वर है जबकि चरित्र ईश्वर है। चित्र की अपेक्षा चरित्र की सुन्दरता पर ही ध्यान रखना चाहिए। आज के समय में चित्र की सुन्दरता की मांग बढ़ गई है तथा चरित्र की सुन्दरता से ध्यान भटक गया है। चरित्र विकृत हो गया है। चित्र सजाने का सामान बाजार में मिलता है। आवश्यकता चरित्र को सजाने की है और इसका सामान श्रीमद् भागवत में ही मिल सकता है। अत: हम श्रीमद् भागवत का अध्ययन कर अपने चरित्र को उज्ज्वल बनाएं।
समाजसेवा में अहम भूमिका निभा रहा ट्रस्ट
सायन-धारावी में 24 अप्रैल को 5 जोड़ों और 7 मई 2019 को ट्रस्ट ने कनार्टक के यादगिरी तालुका, गांव रामसमुद्रम में 14 जोड़ों का सामूहिक विवाह समारोह के दौरान धूमधाम से ट्रस्ट ने शादी करवाई। यहां भी यह ट्रस्ट 21 साल से सामूहिक विवाह करवा रहा है। यह ट्रस्ट मुंबई ही नहीं बल्कि अन्य प्रदेश में भी विविध आयोजन कर समाजसेवा में अहम भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा पंच देवता मंदिर बनाने का भी वीणा उठाया है, जिसका भूमिपूजन हो चुका है। ट्रस्ट से बड़ी संख्या में लोग जुड़े हैं।
जन्म से कोई व्यक्ति बड़ा नहीं होता
जन्म से कोई व्यक्ति बड़ा नहीं होता कर्म ही बड़ा बना सकता है। मनुष्य को उसके अच्छे कर्म ही अमर बनाते है। हर मनुष्य में संभावना है, उसकी क्षमता का पूरा उपयोग करना समाज पर निर्भर है। जब हम सभी मानवतावाद के सिद्धांत पर प्रेरित होकर काम करेंगे।