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पारवती का आला गीला गौर क सोनरो टीको

राजस्थानी समाज का गणगौर उत्सव: बिंदोले की धूम, गुड़ला सवारी के कई आयोजन

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Gangaur Festival of Rajasthani society

Gangaur Festival of Rajasthani society

मुंबई. सोलह दिवसीय गणगौर पर्व का उत्साह दशा माता के व्रत-पूजन पूर्ण होने के साथ ही प्रवासी राजस्थानी बहुल इलाकों में जम गया। जगह-जगह आयोजित बिंदोळे में लोकगीत गाकर युवतियों व महिलाओं ने नाच-गाकर ईसर-गौर को मनाया। वहीं, गुड़ला सवारी के आयोजन भी अब दिखने लगे है।
दशा माता की पूजा-आराधना शनिवार सुबह पूर्ण होने के बाद इसी दिन शाम से ही शहर के राजस्थानी बाहुल्य प्रवासियों के क्षेत्र में राजस्थानी संस्कृति का त्योहार की रंगत बिखरनी शुरू हो गई। गणगौर पर्व की धूमधाम बढ़ गई। इसमें शामिल महिलाएंं, युवतियां और बच्चियां सुबह से ही सज-संवरकर विधिविधान से पूजा में भाग ले रही हैं। अपराह्न बाद सोसायटी-अपार्टमेंट के फ्लेटों में बिंदोळों में गूंजते लोकगीत और नाचती-गाती महिलाएं एवं युवतियां गणगौर पर्व का उल्लास बढ़ा रही है। इस दौरान शाम को गुड़ला सवारी भी आयोजित होते हैं। बिंदोळे के दौरान नृत्य प्रतियोगिता, हास-परिहास, वेशभूषा आदि के आयोजन भी हो रहे हैं।
गणगौर पूजा में महिलाएं, पूजो ए पुजारी बाया काई काई मांगो मांगा ए अन्न धन लाज मांगूं लक्ष्मी...Ó गोर गोर घूमती पूजो इसर पारवती...पारवती का आला गीला गौर क सोनरो टीको ...समेत कई पारम्परिक लोकगीत बड़े चाव से गाकर पूजा में भाग ले रही है।

ईसर-गौर बनकर लगाए ठुमके
बिंदोळे के दौरान कई सोसायटी-अपार्टमेंट में युवतियां एवं महिलाएं ईसर-गौर बनकर गणगौर पर्व की रोनक बढ़ा रही है। इस दौरान उनकी वेशभुषा बिल्कुल अलग तरीके की रहती है। बिंदोळे के आयोजन में आयोजक परिवार की ओर से गेट-टू-गेदर के कार्यक्रम भी किए जा रहे हैं। जिसमें सगे-संबंधी, परिजनों के अलावा अन्य कई आमंत्रित युवतियां एवं महिलाएं मौजूद रहकर सक्रिय रहती हंै।

शृंगार कर पारंपरिक परिधान में की पूजा
उल्लासनगर. शहाड मोहने रोड पर स्थित मंगेशी इमारत के प्रांगण हॉल में मारवाड़ी समाज की सुहागिनों ने गणगौर के लोक गीत गाकर समां बांधा। सुभाष अग्रवाल ने बताया कि किरण अग्रवाल, कविता खेतान, विशाखा शर्मा, अनीता शर्मा और उनकी सहेलियों ने श्रृंगार कर पारंपरिक परिधान पहनकर पूजा करने के पश्चात गणगौर के गीत गाए। "गोर गोर घूमती पूजो इसर पारवती-पारवती का आला गीला गौर क सोनरो टीको। गीतों के बाद सभी महिलाओं ने प्रतिभोज का आयोजन किया गया।

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