9 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

महाराष्ट्र में तीसरी से आठवीं क्लास के स्टूडेंट्स को देना होगा एग्जाम, लागू होंगे नए नियम

महाराष्ट्र में अब तीसरी से आठवीं कक्षा के छात्रों को अब परीक्षा देनी पड़ेगी। वर्तमान में कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को बिना परीक्षा दिए ही अगली कक्षा में भेज दिया जाता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

2 min read
Google source verification
maharashtra_exam.jpg

Maharashtra Exam

महाराष्ट्र में अब स्कूली छात्रों के लिए तीसरी से आठवीं तक के स्टूडेंट्स के लिए एग्जाम का केरल पैटर्न आयोजित किया जाएगा। स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने इस संबंध में जानकारी दी है। महाराष्ट्र में फिलहाल कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को बिना एग्जाम दिए ही अगली कक्षा में भेज दिया जाता है। लेकिन इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जिसपर काफी लोगो का कहना है की स्टूडेंट्स में यह मानसिकता बना दी गई है कि फेल नहीं होंगे, पढ़ेंगे ही क्यों।

पढ़ाई-लिखाई में ज्यादा रुचि नहीं रहने से एजुकेशन सिस्टम में रणनीतिक बदलाव होगा। इसके मुताबिक, राज्य में शिक्षा का 'केरल पैटर्न' लागू किया जाएगा। पहली और दूसरी के छात्र छोटे हैं। इसलिए, उन्हें बिना परीक्षा दिए तीसरी और बाद की कक्षाओं के लिए आयोजित किया जाएगा। दीपक केसरकर ने यह भी कहा कि हालांकि परीक्षाएं कराई जाएंगी लेकिन आठवीं कक्षा तक किसी भी छात्र को अनुत्तीर्ण नहीं किया जाएगा। यह भी पढ़े: महाराष्ट्र में खसरे का तांडव, अब तक 12 बच्चों की मौत; 3208 मरीजों में मिले लक्षण

बता दें कि तीसरी कक्षा से फिर से वार्षिक अभ्यास परीक्षा आयोजित की जाएगी। यदि आप प्रैक्टिस एग्जाम में फेल हो जाते हैं या कम अंक प्राप्त करते हैं, तो आपको दोबारा परीक्षा देना पड़ेगा। इस फैसले पर अमल अगले साल से जारी किया जाएगा। उसके बाद अगले साल की परीक्षाएं चरणबद्ध तरीके से कराई जाएंगी और हर 10 साल में पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाएगा।

केंद्र सरकार की शिक्षा नीति के तहत कक्षा आठवीं तक बगैर परीक्षा के पढ़ाई से होने वाले नुकसान के मद्देनजर महाराष्ट्र सरकार चाहती है कि तीसरी कक्षा से हर माह परीक्षा आयोजित की जाए। इस परीक्षा में फेल होने वाले बच्चों पर टीचर खास ध्यान देंगे। सरकार का मानना है कि प्रतिस्पर्धा बढने से शिक्षा की गुणवत्ता अच्छी हो सकेगी। राज्य के स्कूली शिक्षामंत्री दीपक केसरकर ने पिछले दिनों देश के सर्वाधिक साक्षर राज्य केरल की शिक्षा व्यवस्था का अध्ययन करने के लिए शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ केरल का दौरा किया।