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रसराज मृदुल का व्याख्यान

कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र का वर्णन

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Mumbai news

रसराज मृदुल का व्याख्यान

मुंबई.

दुर्गामाता जी धर्मार्ध चेरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में साकीनाका के खैरानी रोड स्थित दुर्गामाता मन्दिर के परिसर में चल रहे संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में राधा-कृष्ण की प्रतिकृति बना कर फूलों की होली खेली गई। साथ ही इस कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र का व्याख्यान करते हुए व्यासपीठ से मथुरा, वृंदावन के रसराज मृदुल ने कहा कि गरीबी से बुरा हाल झेल सुदामा की पत्नी ने सुदामा को उनके पास जाने का आग्रह किया और कहा, श्रीकृष्ण बहुत दयावान हैं, इसलिए वे हमारी सहायता अवश्य करेंगे। सुदामा ने संकोच-भरे स्वर में कहा, श्रीकृष्ण एक पराक्रमी राजा हैं और मैं एक गरीब ब्राह्मण हूं। मैं कैसे उनके पास जाकर सहायता मांग सकता हूं यह सुन सुदामा की पत्नी तुरंत उत्तर दिया अरे, तो क्या हुआ मित्रता में किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं होता। आप उनसे अवश्य सहायता मांगें। अंतत: सुदामा श्रीकृष्ण के पास जाने को राजी हो गए। उसकी पत्नी पड़ोसियों से थोड़े-से चावल मांगकर ले आई तथा सुदामा को वे चावल अपने मित्र को भेंट करने के लिए दे दिए और सुदामा द्वारका के लिए रवाना हो गए। उषा किरण द्विवेदी, ओम प्रकाश द्विवेदी, मधुबाला द्विवेदी, ऊषा किरण द्विवेदी, उमेश द्विवेदी नरेन्द्र उपाध्याय, अशोक कनौजिया, जितेन्द्र चौधरी आदि उपस्थित थे।