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जिस गांव में कोई नहीं रहता, वहां बन गए 4907 बर्थ सर्टिफिकेट! महाराष्ट्र से यूपी-बिहार तक बड़ा फर्जीवाड़ा

Fake Birth Certificate Scam: आरोपी अजय कुमार दुबे को यवतमाल पुलिस की हिरासत से जलगांव लाया गया है और पूछताछ में उसने फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने की बात स्वीकार की है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Jan 20, 2026

Pune Warkari crime

महाराष्ट्र पुलिस (Photo: IANS/File)

महाराष्ट्र के जलगांव जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। पारोला तहसील के भाटपुरी गांव में वर्तमान में कोई भी नहीं रहता है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में वहां से 4907 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। इस बड़े फ्रॉड का खुलासा होने के बाद अब इसकी जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है।

क्या है पूरा मामला?

जलगांव के एसपी डॉ. महेश्वर रेड्डी के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा रताले ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले छोटे से गांव भाटपुरी में हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गांव में कोई नहीं रहता, लेकिन एक शातिर अपराधी ने ग्राम पंचायत का यूजर आईडी और पासवर्ड हैक कर इस गांव के नाम पर हजारों जन्म प्रमाण पत्र बना डाले। जांच में यह साफ हुआ है कि रताले ग्राम पंचायत की केवल यूजर आईडी और पासवर्ड को हैक किया गया था, पूरी सरकारी वेबसाइट से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई।

एसपी रेड्डी ने बताया कि आरोपी अजय कुमार दुबे बिहार का निवासी है। उसे यवतमाल पुलिस से हिरासत में लेकर जलगांव लाया गया है और पूछताछ में उसने फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने की बात स्वीकार की है। उसने फर्जीवाड़ा कर 4907 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार किए। ग्राम पंचायत का आईडी हैक कर कई अलग-अलग बोगस आईडी बनाई गईं।

पुलिस के मुताबिक, इस रैकेट के तार सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार से जुड़े कई संदिग्ध जन्म प्रमाणपत्र भी जांच के दौरान सामने आए हैं।

किरीट सोमैया पहुंचे भाटपुरी

भाजपा नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने सोमवार को भाटपुरी गांव का दौरा किया। उन्होंने इस मामले को देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया। सोमैया ने कहा, यह केवल एक तकनीकी धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं को भारत में अवैध रूप से बसाने का एक बड़ा षडयंत्र है। मुंबई उनका पहला टार्गेट है। उन्होंने आगे बताया कि उत्तर प्रदेश में भी एक स्थान पर 52 हजार फर्जी जन्म प्रविष्टियां पाई गई हैं।

सोमैया ने कहा, अब तक महाराष्ट्र में लगभग 2 लाख 24 हजार फर्जी जन्म प्रमाण पत्र रद्द किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने SIT का गठन कर दिया है और इस मास्टरमाइंड के पीछे छिपे असली चेहरों को बेनकाब किया जाएगा।

कैसे हुआ खुलासा?

इस मामले की शुरुआत यवतमाल से हुई, जहां पुलिस ने आरोपी अजय कुमार दुबे को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान आरोपी ने कबूल किया कि उसने जलगांव के भाटपुरी गांव का इस्तेमाल कर हजारों प्रमाण पत्र बनाए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गांव कागजों में मौजूद है, लेकिन वहां कोई आबादी नहीं है। स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों की शिकायत पर अब जलगांव पुलिस ने अलग से मामला दर्ज किया है।

जांच में पता चला कि 2010 से 2025 के बीच हजारों जन्म प्रमाणपत्रों की झूठी एंट्री की गई है। पुलिस को शक है कि इस रैकेट के तार उत्तर प्रदेश और बिहार तक फैले हुए हैं और यह एक अंतरराज्यीय गिरोह का काम है। पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड कौन है और कितने राज्यों में इसका नेटवर्क फैला हुआ है।