
सड़क किनारे खड़े ऑटो। फाइल फोटो- आईएएनएस
मुंबई। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने गैर मराठी ऑटो रिक्शा चालकों के मुद्दे पर शिवसेना नेता संजय निरुपम के पत्र को लेकर कहा कि गलत तरीके से किसी ऑटो चालक पर कानूनी कार्रवाई की गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। प्रताप सरनाईक ने कहा कि उन्होंने परिवहन आयुक्त से बात की है और उन्हें निर्देश दिए हैं कि प्रवासियों को मराठी सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। उन्होंने कहा कि जिन ऑटो चालकों को यात्रियों से बातचीत करने में परेशानी होती है, उन्हें नोटिस देकर मराठी सीखने का समय दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर इस अवधि में ऑटो चालक मराठी नहीं सीख पाते हैं तो उन्हें तीन महीने का नोटिस देकर बैज निलंबित किया जाए। परिवहन मंत्री ने कहा कि क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के अधिकारियों को इसी व्यवस्था के अनुसार काम करने की अनुमति दी गई है। वहीं दूसरी तरफ मुंबई में सोमवार को कई जगहों पर ऑटो-रिक्शा चालकों ने मराठी भाषा में पर्याप्त दक्षता न दिखा पाने के कारण कथित उत्पीड़न और कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी।
रिपोर्टों के अनुसार शहर के उपनगर कांदिवली के लोखंडवाला और दहानुकरवाड़ी इलाकों में चालकों ने काम रोक दिया और साथी चालकों से विरोध में शामिल होने की अपील की। उन्होंने परिवहन अधिकारियों की ओर से भाषा की जांच के तरीकों पर नाराजगी जताई। विरोध कर रहे हिंदी भाषी चालकों ने कहा कि उनमें से कई दशकों से मुंबई में रह रहे हैं और काम कर रहे हैं। उन्होंने मराठी का सीमित ज्ञान होने पर सजा दिए जाने के तर्क पर सवाल उठाया। इन चालकों का कहना है कि हम दशकों से मुंबई में रह रहे हैं और ऑटो-रिक्शा चला रहे हैं। हम मराठी समझते हैं और कुछ हद तक बोल भी सकते हैं। भाषा के नाम पर हमें क्यों परेशान किया जा रहा है।
यह विरोध महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले के बाद हो रहा है, जिसमें ऑटो-रिक्शा और टैक्सी परमिट धारकों के लिए मराठी का बुनियादी ज्ञान अनिवार्य कर दिया गया था। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने घोषणा की थी कि परमिट केवल उन्हीं आवेदकों को जारी किए जाएंगे जो मराठी पढ़ और बोल सकते हैं। सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद राज्य की आधिकारिक भाषा को बढ़ावा देना और उसकी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना है। हालांकि ऑटो-रिक्शा यूनियनों ने इस कदम का विरोध किया है।
उनका तर्क है कि भाषा की सख्त शर्तों से गैर-मराठी भाषी समुदायों के हजारों ड्राइवरों की आजीविका पर बुरा असर पड़ सकता है। अगस्त में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) की ओर से सत्यापन अभियान फिर से शुरू करने के बाद यह मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया। ऑटो चालकों का आरोप है कि नई जांच, नोटिस और संभावित जुर्माने ने उन लोगों के बीच डर पैदा कर दिया है जो बातचीत के लिए जरूरी स्तर की मराठी नहीं बोल पाते हैं। अधिकारियों के अनुसार आरटीओ ने अब तक पूरे राज्य में 8,217 ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों की जांच की है और मराठी का पर्याप्त ज्ञान न होने के आरोप में 1,268 लोगों को नोटिस जारी किए हैं।
Updated on:
24 Aug 2026 04:45 pm
Published on:
24 Aug 2026 04:18 pm
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