
Uddhav Thackeray
मुंबई में बहुत ही जल्द निकाय चुनाव (Civic Polls) होने वाले हैं, महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया वोट बैंक भी उभरता हुआ दिखाई दे रहा है। अब सभी पार्टियों के बीच 'मराठी मुस्लिम' को लेकर राजनीति शुरू हो गई हैं। एक तरफ जहां उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना ने दावा किया है कि उन्हें मराठी मुसलमानों का साथ मिल रहा है तो दूसरी तरफ बीजेपी ने इसे तुष्टीकरण की राजनीति करार दिया हैं।
पिछले महीने 22 अक्टूबर को उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के मुखपत्र सामना ने पहले पेज पर इस बात का जिक्र किया गया था कि 'मराठी मुसलमान' उद्धव गुट का समर्थन कर रहे हैं। इस पर बीजेपी ने फौरन जवाब दिया और पार्टी पर तुष्टीकरण का आरोप लगाया हैं। मुंबई बीजेपी प्रमुख आशीष शेलार ने उद्धव ठाकरे गुट पर निशाना साधते हुए कहा कि शिवसेना उद्धव बालासाहेब पार्टी मराठी और मुस्लिम वोट हासिल करना चाहती है, लेकिन शब्दों के साथ बड़ी चतुराई से खेल किया है। यह भी पढ़े: महाराष्ट्र के लिए 2 लाख करोड़ की परियोजनाओं को केंद्र सरकार ने दी मंजूरी, पीएम नरेंद्र मोदी ने किया एलान
बता दें कि इसे उद्धव ठाकरे गुट के नए मास्टर स्ट्रोक के तौर पर देखा जा रहा है। गणित और राज्य में बदली हुई राजनीतिक को ध्यान में रखते हुए अब वोट बैंक भी पूरी तरह से बदलते हुए नजर आ रहे हैं। अभी तक शिवसेना (उद्धव गुट) को हिंदुत्व की राजनीति करते हुए देखा गया है। प्रतिष्ठित बीएमसी के इलेक्शन में उद्धव गुट पिछले 25 सालों से कंट्रोल करते आ रही है। अब देखने वाली बात यह होगी की क्या इस बार जनता बदलती हुई इस उद्धव गुट को स्वीकार करेगी या नहीं। खासकर जब बीजेपी इस पर कब्जा जमाने का हर प्रयास करते नजर आ रही है, जोकि राज्य और केंद्र दोनों में ही सत्ता संभाले हुए है।
वहीं, दूसरी तरफ एनसीपी और कांग्रेस दोनों ने उद्धव गुट के साथ गठबंधन करने का वादा किया है, इसे जीतने के लिए, पार्टी को न सिर्फ अपने मराठी वोट बैंक पर पकड़ बनाने की आवश्यकता है, बल्कि और लोगों को भी जोड़ना पड़ेगा। इसी वजह से अब पार्टी ने नया वोट बैंक बनाना शुरू कर दिया है। मुंबई में मराठी वोट बैंक आबादी का करीब 26-30 फीसदी होने का अनुमान है, मुसलमानों की संख्या लगभग 14-16 फीसदी बताई जा रही है।
हिंदुत्व के लिए जानी जाती थी शिवसेना: बता दें कि एक समय पर अपने उग्र हिंदुत्व के लिए जानी जाने वाली शिवसेना के प्रति मुसलमान अब नरम रूख अपना लिए हैं। साल 2019 के विधानसभा इलेक्शन के बाद बीजेपी की सत्ता से मना करने के लिए एनसीपी और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने के उद्धव ठाकरे के निर्णय ने उस दिशा में एक लंबा सफर तय किया। यही वजह है कि 'मराठी मुस्लिम सेवा संघ (एमएमएसएस)' ने उद्धव ठाकरे की बैठक में पार्टी को अपना समर्थन देने की बात कही हैं।
Updated on:
04 Nov 2022 03:06 pm
Published on:
04 Nov 2022 03:05 pm
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