
Tiger
महाराष्ट्र में अब बाघों को एक जगह से दूसरे जगह पर स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार जल्द ही चंद्रपुर जिले से नवेगांव नागजीरा टाइगर प्रोजेक्ट में बाघ का स्थानांतरण शुरू करने वाली है। राज्य में यह बाघों का इस प्रकार का पहला वैज्ञानिक संरक्षण पुनर्वास होगा। इसका मुख्य उद्देश्य अधिक बाघ वाले इलाकों में बाघों की आबादी को कम करना, मानव-पशु संघर्ष को कम करना और उन इलाकों में बाघों को दोबारा लाना है जहां इन मांसाहारियों की संख्या कम है। महाराष्ट्र वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने इस परियोजना के लिए इस महीने की 15 तारीख को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जरूरी इजाजत मिली थी, जो कुछ समय से ड्राइंग बोर्ड पर है।
वन्यजीव के प्रधान मुख्य संरक्षक सुनील लिमये ने बताया कि यह राज्य में इस तरह का पहला संरक्षण स्थानान्तरण किया जाएगा। वैज्ञानिक जनसंख्या प्रबंधन के लिए ब्रम्हापुरी वन प्रभाग से 4-5 युवा मादा बाघों को एनएनटीआर में स्थानांतरित करने की योजना है। हम पहले दो बाघों को छोड़ेंगे, इस दौरना उनपर नजर रखेंगे और एक बार जब वे बस जाएंगे, तो अन्य को रिहा किया जाएगा। यह भी पढ़ें: Mumbai News: उद्धव ठाकरे गुट का एलान, परमिशन नहीं मिला तो भी शिवाजी पार्क में होगी दशहरा रैली
विदर्भ में बाघों की संख्या 396: बता दें कि इस परियोजना की सफलता से बाघों की भीड़भाड़ वाले लैंडस्केप से एनएनटीआर और सह्याद्री बाघ परियोजना जैसे इलाकों में स्थानांतरित होने की संभावनाएं खुल जाएंगी, जिनमें इन मांसाहारी की संख्या कम है। साल 2020 में विदर्भ में बाघों की संख्या 331 से बढ़कर साल 2021 में 396 हो गई है।
वहीं, दूसरी तरफ चंद्रपुर जिले में इनमें से करीब 60 फीसदी हैं, जिससे मानव-पशु संघर्ष होते हैं। वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ब्रह्मपुरी में 50 वयस्क बाघ और 25-25 उप-वयस्क और शावक थे। यह देश में कई बाघ परियोजनाओं से ज्यादा है।
Published on:
20 Sept 2022 08:46 pm
बड़ी खबरें
View Allमुंबई
महाराष्ट्र न्यूज़
ट्रेंडिंग
