महाराष्ट्र के सांगली के जिला परिषद सीईओ जितेंद्र डूडी ने बताया कि दिल्ली, केरल और पुणे की एक बालवाड़ी स्कूल में अपनाए जा रहे पैटर्न का स्टडी किया। सांगली में 694 गांव हैं और हर गांव के एक स्कूल को संपूर्ण अपग्रेड करने का टारगेट रखा गया है।
पहली क्लास के बच्चों को अक्षर का ज्ञान नहीं है। दूसरी के बच्चे सामान्य जोड़, घटाना नहीं कर पाते हैं। पांचवीं क्लास के स्टूडेंट्स को पहाड़ा नहीं आता और आठवीं कक्षा के बच्चों को वाक्य-विन्यास नहीं आता है... ऐसी रिपोर्ट हर साल पढ़ने में आती है, लेकिन हालात सुधारने पर स्पेशल काम नहीं किया जाता हैं। इस छवि को तोड़ते हुए महाराष्ट्र के सांगली जिले ने एजुकेशन को लेकर ऐसा जनआंदोलन शुरू किया गया है कि 6 महीने में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले एक लाख बच्चों के शैक्षणिक स्तर में 15 से 17 फीसदी सुधार हुआ है।
पूरे देश में इस माडल की चर्चा खूब हो रही है। खास बात यह कि इस आंदोलन के नायक इस जिले के करीब 5 हजार टीचर और 1.25 लाख से अधिक स्टूडेंट्स के पेरेंट्स के साथ-साथ सभी सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी हैं। यह भी पढ़े: Maharashtra News: चंद्रपुर में युवक को बेहरमी से उतारा मौत के घाट, सिर को धड़ से अलग कर 'खेला फुटबॉल'
कोरोना महामारी में जब देश-दुनिया में शैक्षणिक गतिविधियों पर रोक लगी, तो 28 लाख की आबादी वाले महाराष्ट्र के सांगली जिले के ग्रामीण अंचल में एजुकेशन सुधार का आंदोलन शुरू किया गया। इसे दिशा देने वाले जिला परिषद सीईओ जितेंद्र डूडी बताते हैं कि शैक्षणिक गुणवत्ता को सुधारने के लिए सबसे पहले इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार की आवश्यकता है, इसलिए हमने पहली से आठवीं क्लास तक तक के स्कूलों को चुना। पिछले साल जनवरी से प्रोजेक्ट शुरू हुआ और पहले चरण में अब तक 171 का कायाकल्प हो चुका है। इसमें टायलेट में सुधार, साफ पानी, बिजली व्यवस्था से लेकर कंप्यूटर और साइंस लैब तक शामिल है। एक प्रकार से नई शिक्षा नीति में सुझाए गए सभी मापदंडों को शामिल किया गया है।
सांसद और विधायक निधि से मिली राशि: बता दें कि यह आंदोलन हर किसी को साथ लेकर कैसे आगे बढ़ रहा है, यह भी अपने आप में एक केस स्टडी है। स्कूलों में सुधार के लिए धनराशि उपलब्ध करवाने का जिम्मा सांसद, विधायकों और अफसरों ने लिया। ग्रामीणों ने 10 लाख रुपये जुटाकर दिए हैं। इस तरह से 171 स्कूलों का कायाकल्प हो चुका है। बाकी का काम शुरू हुआ है।
250 टीचरों ने कंटेट तैयार किया: राशि इक्कठा करने के बाद अब बारी थी सरकारी स्कूलों के बच्चों के शैक्षणिक स्तर में सुधार की। टीचरों द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर ही 250 टीचरों का चयन किया गया और उनसे ही कंटेट तैयार करने के लिए कहा गया। इस प्रोसेस से जुड़े मिराज तालुका में पदस्थ टीचर ताशीर अत्तार बताते हैं कि हमने अंग्रेजी और मराठी में ऐसे कंटेंट विकसित किए, जो स्थानीय स्तर पर बच्चों को आसानी से समझ में आ सकें।
पेरेंट्स की भी ट्रेनिंग: टीचरों द्वारा तैयार कंटेट के आधार पर सबसे पहले जिले के करीब 5 हजार टीचरों और साथ में हर ब्लाक के इच्छुक अभिभावकों को प्रशिक्षित किया गया। जिला परिषद शाला, पाडली में शिक्षक महादेव बलवंत देसाई के मुताबिक पेरेंट्स को प्रशिक्षित करने से यह फायदा हुआ कि वह बच्चों को पढ़ाई में मदद करने लगे।