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Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र के सियासी संकट के बीच अब टूटने को है शिवसेना! सीटों के ताजा गणित से समझिए अब आगे क्या

महाराष्ट्र में उद्धव सरकार के गिरने का खतरा अब बढ़ गया है। सीएम उद्धव की अपील के बावजूद शिवसेना में बगावत थमी नहीं है। शिवसेना के सात और विधायक एकनाथ गुट से जा मिले हैं। इस हिसाब शिवसेना पूरी तरह से टूटने की कगार पर है।

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Uddhav Thackeray and Eknath Shinde

मुंबई: महाराष्ट्र में उद्धव सरकार गिरेगी या नहीं इसकी तस्वीर आज लगभग साफ हो जाएगी। हालांकि सब कुछ नंबर गेम पर टीका हुआ है। ताजा अपडेट के अनुसार एकनाथ शिंदे खेमे की ताकत अब बढ़ गई है। दरअसल शिवसेना के बागी विधायकों की संख्या अब 41 पहुंच गई है। साथ ही सात निर्दलीय विधायक भी हैं। जिसके कारण एकनाथ शिंदे के पास कुल 48 विधायकों के समर्थन का दावा किया जा रहा है। ऐसे में सीएम उद्धव ठाकरे के सामने अपनी सत्ता को बचाए रखने की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

महाराष्ट्र में विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं। जिसके चलते सरकार बनाने के लिए 145 विधायकों की जरूरत है। लेकिन शिवसेना के एक विधायक के निधन के कारण अब 287 विधायक ही बचे हैं। इस लिहाज से सरकार बनाने के लिए 144 विधायकों की जरूरत है। बगावत से पहले महा विकास अघाड़ी को 169 विधायकों का समर्थन हासिल था और भाजपा को 113 और विपक्ष में पांच अन्य विधायक हैं। हालांकि अब सियासी घटनाक्रम बदल गया है।

भाजपा को अपनी सरकार बनाने के लिए 31 विधायकों की जरूरत है। ऐसे में एकनाथ शिंदे के साथ 48 विधायकों के होने का दावा किया जा रहा है। इस लिहाज से शिंदे गुट और बीजेपी के साथ जानें से बहुमत का आंकड़ा आसानी से पहुंच जा रहा है। फिलहाल ताजा आंकड़े हैं इस लिहाज से उद्धव सरकार विधानसभा में बहुमत नहीं साबित कर सकती है।

यह भी पढ़ें-CM उद्धव को फिर झटका, अपील के बावजूद शिवसेना के सात और विधायक हुए बागी

-महाराष्ट्र में सियासी संग्राम के बीच अब आगे क्या-क्या हो सकता है
महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट के बीच शिवसेना नेता संजय राउत ने पहले ही विधानसभा भंग करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने इसे लेकर ट्वीट भी किया है। राउत ने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा भंग होने की दिशा में जा रही है। लेकिन फिलहाल सरकार बहुमत में है इसलिए राज्यपाल की तरफ से भंग करने की उम्मीद बहुत कम है। ऐसे में मुख्यमंत्री को एक सत्र बुलाकर बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल की तरफ से कहा जा सकता है। लेकिन अगर शिवसेना बहुमत साबित नहीं कर पाती है तो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी को मौका दिया जा सकता है। फिर भी अगर कोई दल आगे नहीं आया तो राज्यपाल की ओर से सदन भंग करने के लिए कहा जा सकता है। फिलहाल राज्य में जो ताजा समीकरण है उससे यही लग रहा है कि सीएम उद्धव ठाकरे की तरफ से राज्यपाल को विधानसभा भंग करने की सलाह दी जा सकती है।

दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे के पास दलबदल विरोधी कानून का ऑप्शन खुला हुआ है। शिवसेना के 55 विधायक हैं। ऐसे में उनके पास शिवसेना के 41 विधायकों का समर्थन हासिल है। इस लिहाज से वह वह दो तिहाई आंकड़े तक आसानी से पहुंच रहे हैं। अगर वह भाजपा के साथ जाते हैं तो सरकार बन सकती है। लेकिन शिंदे ने बुधवार को कहा था कि उनकी बीजेपी से कोई बातचीत नहीं हो रही है। हालांकि शिंदे के पास भाजपा के साथ जानें के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं नजर आ रहा है। अगर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अपने पद से इस्तीफा दें और विधानसभा भंग करने के लिए कहें तो राज्यपाल की तरफ से राष्ट्रपति शासन लगाने या बड़े दल को बहुमत साबित करने के लिए कहा जा सकता है। हालांकि राष्ट्रपति शासन लगने के आसार बहुत कम ही दिख रहे हैं।

शिवसेना में बगावत के बीच सांसदों के टूटने की भी खबरें सामने आ रही है। अटकलें हैं कि शिवसेना के 19 में से 9 सांसद भी उद्धव से नाता तोड़ सकते हैं। जिसमें एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे, ठाणे से सांसद राजन विचारे, वाशिम की एमपी भावना गवली और नागपुर की रामटेक से सांसद कृपाल तुमाने का समावेश है। हालांकि इसे लेकर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।

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