
Uddhav Thackeray
महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से पिछले महीने बगावत कर लिया था। ये बगावत शिवसेना में हुई सबसे बड़ी बगावत है। इस बगावत से न केवल शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को राज्य के सीएम पद से हटा दिया बल्कि अब ये चिंता हो गयी है कि शिवसेना की कमान भी उनके हाथ से चली जाएगी। ऐसे में पार्टी का बागडोर अपने हाथ से न निकल जाए इसके लिये उद्धव ठाकरे ने अपने सार्वजनिक व्यवहार में और अपने व्यक्तित्व में कई बदलाव किए हैं।
बता दें कि महीने भर पहले तक उद्धव ठाकरे के हाथ में महाराष्ट्र की कमान थी और अब उनकी जगह एकनाथ शिंदे को ये कमान मिल गई हैं। पल भरो में अपने हाथ से अचानक इस तरह से राज्य की सत्ता के चले जाने और शिवसेना पर उनके प्रभुत्व को लेकर खडे हुए सवालों ने उद्धव ठाकरे को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। यह भी पढ़ें: Mumbai: अगर एयरपोर्ट पर आपका भी खो जाए सामान तो CISF से करे सीधे संपर्क, 18 महीनों में 27 हजार से अधिक चीजें यात्रियों को लौटाई
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अब पहले से ज्यादा एक्टिव हो गए है। वो अब सबकुछ करते हैं जो वे पहले कभी नहीं करते थे। जो लोग कई सालों से उद्धव ठाकरे को जानते है उनके मुताबिक उद्धव ठाकरे के व्यक्तित्व में बड़ा बदलाव आया है। हमेशा उद्धव ठाकरे पर यह सवाल उठता था कि वे अपने लोगों को समय नहीं देते हैं। उद्धव ने ने अपने करीबी लोगों की एक कोटरी बना रखी है बस वे उनके साथ ही उठते-बैठते हैं। बाकी नेताओं और कार्यकर्ताओं से उद्धव की मुलाकात नहीं हो पाती है। लेकिन सत्ता चले जाने के बाद उद्धव ठाकरे ने अपना नजरिया पूरा बदल दिया है।
बगावत के बाद उद्धव ठाकरे ने अपने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ जुड़ना शुरू कर दिया है। जब से वह मुख्यमंत्री पद से हटे हैं तब से अक्सर वो पार्टी मुख्यालय शिवसेना भवन में नजर आते हैं। पार्टी के पदाधिकारियों के साथ लगातार बैठक कर रहे हैं। अपने आवास 'मातोश्री' पर भी वे पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से मिलते रहते है।
बता दें कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे जबसे सीएम से पूर्व सीएम हुए हैं मीडिया के साथ भी उनका व्यवहार बदल गया है। सीएम पद जाने के बाद अब तक वह दो बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। आमतौर पर उद्धव ठाकरे मुंबई के बाहर ज्यादा सफर नहीं करते, लेकिन अब इस सोच में बदलाव आया है। उद्धव के बेटे और शिवसेना के युवा नेता आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र के कई शहरों में शिव संवाद यात्रा कर रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने ये घोषणा किया है कि अगले महीने वे महाराष्ट्र के दौरे पर निकलेंगे।
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को राजनीतिक गलियारों में एक विनम्र स्वभाव के नेता के तौर पर देखा गया है। उनके भाषणों में पिता बाल ठाकरे और चचेरे भाई राज ठाकरे जैसी आक्रमकता नजर नहीं आती है। उद्धव अपने भाषण में गालियों वाली या धमकाने वाली भाषा का उपयोग नहीं करते हैं लेकिन अब इनके व्यकित्तव में काफी बदलाव आया है। अब वे बागियों के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर अपशब्दों का उपयोग करने से भी नहीं हिचक रहे हैं। रविवार शाम को मुंबई की एक सभा में दिया गया उनका भाषण इसका उदहारण है।
बता दें कि उद्धव ठाकरे अपने भीतर ये तमाम बदलाव इसलिए लाए ताकि गद्दी जाने के बाद पार्टी को जाने से बचा सकें। हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अब बहुत देर हो चुकी है। उद्धव ठाकरे ने अगर ये सब पहले ही कर लिया होता तो इतनी बड़ी बगावत कभी नहीं होती।
Updated on:
25 Jul 2022 09:16 pm
Published on:
25 Jul 2022 09:14 pm
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