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Maharashtra Politics: MVA में पड़ी दरार? शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के इस फैसले के बाद कांग्रेस के बदले सुर

राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन करने का फैसला लेने के बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को कांग्रेस से आलोचना का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट ने द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने के शिवसेना के रुख पर चिंता व्यक्त की है। क्या उद्धव ठाकरे के इस फैसले से महाविकास अघाड़ी में दरार पड़ गई है?

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Balasaheb Thorat and Uddhav Thackeray

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आगामी राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को अपना समर्थन देने का फैसला लिया है। उद्धव ठाकरे के इस फैसले के एक दिन बाद शिवसेना को महाराष्ट्र में कांग्रेस से आलोचना का सामना करना पड़ा है। बता दें कि 2019 में शिवसेना+कांग्रेस+एनसीपी ने मिलकर महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी सरकार बनाई थी। राज्य के मौजूदा सीएम एकनाथ शिंदे के 39 विधायकों के बगावत के बाद एमवीए सरकार गिर गई। इस बीच महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोराट ने द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने के शिवसेना के रुख पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोराट ने एक ट्वीट के जरिए शिवसेना के वैचारिक दलबदल पर सवाल खड़े किए है। बता दें कि एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को अपना समर्थन देकर कांग्रेस और एनसीपी ने महा विकास अघाड़ी की एकजुटता पर ही सवाल उठाए हैं। यह भी पढ़ें: Maharashtra Politics: शिंदे खेमे द्वारा शरद पवार पर हमले से बौखलाई NCP, 2014 में हुए अपमान की दिलाई याद; जानें पूरा मामला

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को अपना समर्थन देने की घोषणा की है। उद्धव ठाकरे के एलान के साथ ही शिवसेना के सांसदों और नेता खुश है लेकिन एमवीए गठबंधन की अन्य पार्टियों एनसीपी और कांग्रेस उद्धव के इस फैसले से नाखुश है। उद्धव के इस फैसले से महाविकास अघाड़ी गठबंधन में दरार पड़ती साफ़ नजर आ रही है। महाराष्ट्र कांग्रेस के दिग्गज नेता बालासाहेब थोराट ने ट्वीट में लिखा कि राष्ट्रपति चुनाव एक वैचारिक लड़ाई है। यह लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए चल रहा संघर्ष है। यह महिला बनाम पुरुष या आदिवासी बनाम गैर-आदिवासियों का सवाल नहीं है।

बालासाहेब थोराट ने आगे कहा कि जो लोग संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के पक्ष में हैंसाथ खड़े है, वे यशवंत सिन्हा को सपोर्ट कर रहे हैं। शिवसेना ने द्रौपदी मुर्मू का समर्थन क्यों किया? उन्होंने इसकी कुछ वजह बताए, लेकिन हम इसके पीछे शिवसेना नेतृत्व की वास्तविक भूमिका के बारे में कुछ नहीं कह सकते।

कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट ने कहा कि शिवसेना एक अलग राजनीतिक दल है, इसलिए उन्हें उन्हें अपना फैसला लेने का पूरा हक है। हालांकि, इस वैचारिक लड़ाई में शिवसेना द्वारा निभाई गई भूमिका जब गैर-लोकतांत्रिक तरीके से राज्य सरकार को गिराया गया और शिवसेना के अस्तित्व को जिस तरह चुनौती दी गई, वह थोड़ा सा समझ के परे है। शिवसेना एमवीए गठबंधन का हिस्सा है, लेकिन उद्धव ठाकरे ने फैसला करते समय इस विषय पर किसी से कोई चर्चा नहीं किए।

बता दें कि मंगलवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करेगी। पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना ने कभी भी ऐसे विषय पर राजनीति नहीं की है। हमेशा देशहित पहले देखा है। वैसे तो हमें विरोध करना चाहिए था लेकिन इतने छोटे का मन का मैं नहीं हूं।