
GST
महाराष्ट्र के कोल्हापुर शहर के व्यापारियों ने आवश्यक खाद्य वस्तुओं पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) लगाने का विरोध किया हैं। व्यापारियों के मुताबिक अगर जीएसटी लगाया जाता है तो इससे न सिर्फ कारोबार बल्कि किसान भी प्रभावित होंगे।इसको लेकर कोल्हापुर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (KCCI) के प्रतिनिधियों ने जीएसटी अधिकारियों से मुलाकात की और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक याचिका सौंपी है।
जीएसटी परिषद ने पूर्व-पैक और पूर्व-लेबल वाले खाद्यान्न, दूध, शहद और कई अन्य कृषि उत्पादों पर 5 प्रतिशत जीएसटी का प्रस्ताव दिया है। केसीसीआई के अध्यक्ष संजय शेटे ने कहा कि पहली बार जरूरी सामान को जीएसटी के दायरे में लाया जा रहा है जिससे कारोबार और भी चौपट हो जाएगा। यह भी पढ़ें: Maharashtra Bullet Train: शिंदे सरकार का बड़ा फैसला, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के लिए सभी तरह की मंजूरी दी
संजय शेटे ने आगे कहा कि कीमतें बढ़ेंगी, बिक्री घटेगी और छंटनी अधिक होगी। इससे कृषि क्षेत्र को भी बड़ी मात्रा में नुकसान होगा। हम चाहते हैं कि इस प्रस्ताव को जल्द से जल्द वापस लिया जाए। अगर इस फैसले को वापस नहीं लिया गया तो हम सड़कों पर उतरेंगे और इसका विरोध करेंगे। हमें जनता का समर्थन मिलेगा क्योंकि वे सबसे पहले आवश्यक वस्तुओं पर कर लगाने का खामियाजा भुगतेंगे।
संजय शेटे ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म छोटे व्यापारियों के कारोबार को प्रभावित कर रहे हैं। ई-कॉमर्स विनियमित नहीं है बल्कि हमें सख्त नियमों से निपटना होगा। इसलिए, यदि आवश्यक सामान, जो व्यवसाय का एक बड़ा हिस्सा हैं, को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है, तो हमें दोहरी मार पड़ेगी। व्यापारियों ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में लाने का प्रस्ताव उन बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभान्वित करना है, जिन्होंने अपनी खुदरा दुकानें और खाद्य व्यवसाय श्रृंखला शुरू की है। व्यापारियों ने कहा कि वे पहले से ही ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से पीड़ित हैं।
Updated on:
14 Jul 2022 04:40 pm
Published on:
14 Jul 2022 04:38 pm
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