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पर्यटकों का पसंदीदा माथेरान एक साल तक रहेगा सुनसान

Matheran: अगर आप माथेरान की ठंडी हवाओं के बीच अपनी छुट्टियां बिताना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए ही है। क्योंकि आने वाले एक वर्ष तक आप माथेरान नहीं जा सकेंगे।

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पर्यटकों का पसंदीदा माथेरान एक साल तक रहेगा सुनसान

पर्यटकों का पसंदीदा माथेरान एक साल तक रहेगा सुनसान

अरुण लाल
मुंबई. अगर आप माथेरान ( Matheran) की ठंडी हवाओं के बीच अपनी छुट्टियां बिताना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए ही है। क्योंकि आने वाले एक वर्ष तक आप माथेरान नहीं जा सकेंगे। इसके चलते मुंबई, पुणे और सूरत के पर्यटकों का पसंदिदा स्थल माथेरान एक साल तक सूनसान रहेगा। मूसलाधार बारिश के चलते कोंकण और पश्चिमी महाराष्ट्र के कई जिलों में लाखों लोग अभी भी बाढ़ की पीड़ा झेल रहे हैं। बाढ़ का पानी तो उतर गया है, मगर बाढ़ पीडि़त जिंदगी की जद्दोजहद से अब भी जूझ रहे हैं। इंसान तो परेशान हैं ही भारतीय रेल को भी बारिश ने बड़ा नुकसान पहुंचाया है। देश ही नहीं दुनिया भर के सैलानियों को आकर्षित करने वाली माथेरान की ट्वाय ट्रेन (toy train) भी बंद पड़ गई है। बारिश के दौरान ट्वाय ट्रेन के लिए बनाई गई रेलवे ट्रैक का कई जगहों पर आधार खिसक गया है। रेल अधिकारियों की मानें तो ट्वाय ट्रेन के ट्रैक को बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च होंगे। रेलवे ट्रैक को तैयार करने में कई महीने लग सकते हैं। मतलब यह कि ट्वाय ट्रेन के लिए सैलानियों को महीनों इंतजार करना पड़ सकता है।
ट्वाय ट्रेन का मार्ग २० किमी लंबा है। यह ट्रेन नेरल से माथेरान के बीच खूबसूरत पहाडिय़ों के बीच चलती है। मानसून के दौरान ट्वाय ट्रेन की सेवा अमूमन बंद रखी जाती है। बारिश के दौरान अमन लॉज से माथेरान के बीच दो किमी के बीच शटल सेवा चलती है। सेंट्रल रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि २० किमी लंबे रेल मार्ग पर कई जगह बड़ा नुकसान हुआ है। रेल पटरी की मरम्मत सहित अन्य सुविधाएं तैयार करने में कम से कम २० करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसका प्रस्ताव अधिकारियों ने मंजूरी के लिए रेलवे बोर्ड के पास भेजा है।

कई जगहों पर बहे तट बंध

एक अधिकारी ने बताया कि जुलाई में हुई मूसलाधार बारिश से कसारा घाट के साथ ही माथेरान ट्वाय ट्रेन के मार्ग को भी बड़ा नुकसान हुआ है। सर्वेक्षण से पता चला है कि कई जगहों पर रेलवे ट्रैक के लिए बनाए गए तटबंध बह गए हैं। इससे पहले २६ जुलाई, २००५ की बाढ़ में ५० प्रतिशत नैरो-गेज ट्रैक धुल गए थे। तब इन सेवाओं को बहाल करने में लगभग दो साल लगे थे।

चुनौती भरा काम

अधिकारी ने बताया कि सड़क नहीं होने के कारण यहां रेलवे ट्रैक की रिपेयरिंग का काम चुनौती भरा है। पहाड़ी के नीचे नेरल से शुरू कर हम धीरे-धीरे माथेरान पहाड़ी पर चढ़ते हैं। बारिश के बाद आने वाली समस्याओं से निपटने के लिए हम नेरल से माथेरान के लिए रखरखाव और यार्ड सुविधाएं ऊपर ही बनाने पर विचार कर रहे हैं। अभी सभी कोचों को मेंटेनेंस के लिए नेरल लाया जाता है।

हर साल होती है समस्या

सेंट्रल रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि यह समस्या हर साल आती है। बारिश के बाद हमें रेलवे ट्रैक की मरम्मत करानी पड़ती है। इस साल खर्च किया गया पैसा अगले साल काम नहीं आता है। उन्होंने कहा कि रेलवे बोर्ड की अनुमति मिलते ही हम ट्रैक रिपेयरिंग का काम शुरू करेेंगे।

1850 में हुई थी खोज

माथेरान की खोज 1850में ठाणे जिले के तत्कालीन कलेक्टर ह्यूज पोयन्ट्स मलेट ने की थी। यहां की ठंडी आबोहवा और खूबसूरती को देखते हुए मुंबई (बांबे) के तत्कालीन गवर्नर लॉर्ड एल्फिंस्टन ने इसे गर्मी के दिनों में वक्त गुजारने की दृष्टि से विकसित कराया। देश के सबसे छोटे इस हिल स्टेशन पर मुंंबई, पुणे और सूरत से आसानी से पहुंचा जा सकता है।