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Millets : मोटा अनाज देश में… मोटी कमाई विदेश में?

Millet : भारत अकेले ही दुनिया का करीब 38 फीसदी मोटा अनाज पैदा करता है। इसके बावजूद मोटे अनाजों से बने उत्पाद- बेबीफूड, बेकरी, बे्रकफास्ट, रेडी टू ईट फूड, रेडी टू कुक, रेडी टू सर्व, वेवरीज और पशु आहार बेचकर चीन दुनिया में मोदी कमाई कर रहा है। यह तब है जब वह दुनिया का मात्र 9 फीसदी ही मोटा अनाज पैदा करता है।

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मुंबई

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arun Kumar

Feb 21, 2022

Millets : मोटा अनाज देश में... मोटी कमाई विदेश में?

Millets : मोटा अनाज देश में... मोटी कमाई विदेश में?

- बेबी फूड, बेकरी और बेवरीज उत्पाद बेचकर मालामाल हुईं विदेशी कंपनियां
- 38 फीसदी मोटा अनाज अकेले दुनियाभर में पैदा कर भारत उत्पादों से कमाई से चीन से आधा है
- 14 राज्यों के 300 से अधिक जिलों में अनुसंधान, हाईटेक खेती और प्रोसेसिंग यूनिट्स लागाएगा भारत

अरुण कुमार
जयपुर. भारत अकेले ही दुनिया का करीब 38 फीसदी मोटा अनाज (Millet) पैदा करता है। इसके बावजूद मोटे अनाजों से बने उत्पाद- बेबीफूड, बेकरी, बे्रकफास्ट, रेडी टू ईट फूड, रेडी टू कुक, रेडी टू सर्व, वेवरीज और पशु आहार बेचकर चीन दुनिया में मोदी कमाई कर रहा है। यह तब है जब वह दुनिया का मात्र 9 फीसदी ही मोटा अनाज पैदा करता है। भारत दुनिया में सबसे ज्यादा करीब 11388 मेट्रिक टन मोटा अनाज पैदा करके भी कमाई में चीन का आधा है। कारण साफ है कि देश में मोटे अनाज (Millet) की प्रोसेसिंग यूनिट्स बेहद कम हैं। जो हैं भी उनमें वही देसी उत्पाद तैयार होते हैं जिनकी देश में 60 फीसदी से ज्यादा खपत हो जाती है। देश में स्नैक्स, फ्लेक्स, इडली, डोसा, उपमा, बाजरा लड्डू, बाजरा सूजी-पास्ता, बाजरा सेंवई, बाजरा कुकीज, बाजरा ब्रेड/बन, बाजरा केक, बाजरा पिज्जा आदि उत्पादों की अंतर्राष्ट्रीय बाजार के हिसाब से न तो पैकिंग होती है और न ही ब्रांडिंग। इसका खामियाजा देश को उठाना पड़ता है। दुनिया में सबसे ज्यादा बाजरा उत्पादों का निर्यात भारत करता है। यमन, सऊदी अरब और यूएई प्रमुख आयातक हैं। रोस्टेड बाजरे और आटे की मांग अमरीका में सबसे ज्यादा है।
Patrika .com/mumbai-news/coarse-cereals-cure-of-36-diseases-7151835/" target="_blank">यह भी पढ़ें : मोटा अनाज.... 36 रोगों का इलाज
देश में हरित क्रांति ने गेहूं और चावल के चलते मोटे अनाजों (Millets) को थालियों से बाहर की दिया और देश कुपोषित होने लगा। मक्का, बाजरा, जौ, ज्वार, रागी, कोदो, सामा, सांवा जैसे अनाजों की पौष्टिकता के चलते जब दुनिया में मांग बढ़ी और विदेशी कंपनियां उत्पाद बेचकर मालामाल होने लगी तब भारत की नींद खुली।
केंद्र सरकार ने साल 2018 को मोटा अनाज वर्ष मनाया और मोटे अन्नों का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी तय किया। भारत के प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र ने माना और 2023 को मोटे अनाज का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया। अब सरकार देश-विदेश में मोटे अनाज की ब्रांडिंग कर देश के 14 राज्यों के 300 से अधिक जिलों में अनुसंधान, हाईटेक खेती के साथ प्रोसेसिंग यूनिट्स भी लगाने जा रही है।

बेकरी उत्पादों का निर्यात ज्यादा
भारत से रेडी टू ईट, रेडी टू कुक और रेडी टू सर्व उत्पादों का निर्यात 2020-21 में 823 मिलियन डॉलर की अपेक्षा 2021-22 में 1011 मिलियन डॉलर अनुमानित है। बीते 3 साल में 5,438 मिलियन डॉलर के उत्पादों का निर्यात हुआ। इनमें 90 फीसदी बिस्कुट, कन्फेक्शनरी, भारतीय मिठाइयां और स्नैक्स हैं। रेडी टू सर्व उत्पादों में 31.69 फीसदी पापड़, 34.3 फीसदी पाउडर एवं स्टार्च, 24.28 फीसदी विदेश भेजे जाते हैं।

इन डी-हुलर मशीन ने बदल दी दुनिया
तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय और केंद्रीय कृषि इंजीनियरिंग संस्थान द्वारा विकसित डी-हुलर मशीन ने मोटे अनाज की दुनिया ही बदल दी। इसका उपयोग रागी और बाजरे की भूसी को हटाने में किया जाता है, जो काफी मुश्किल था। अब किसान रागी और बाजरे की खेती में भी रुचि ले रहे हैं।

भोजन में मोटा अनाज क्यों जरूरी
मोटे अनाजों में प्रोटीन, खनिज, लोहा, कैल्शियम, मैगनीज, फासफोरस, पोटाशियम, जिंक व जरूरी विटामिन होते हैं। शारीरिक एवं मानसिक विकास के अलावा मोटे अनाज पाचन, हृदय, मधुमेह, एनीमिया, लीवर कैंसर, इम्यूनिटी आदि में लाभकारी हैं। बिहार, झारखंड, उड़ीसा और तेलंगाना में रागी, बाजरे और जौ का शेक युवाओं की खास पसंद है।

ब्रांड के नाम पर कंपनियों की कमाई (रु/किलो)
अनाज साबुत आटा ब्रांडेड आटा
बाजरा 25 35 75
मक्का 26 40 78
जौ 26 38 65
ज्वार 25 34 62
रागी 75 100 162

सरकारें क्या करें प्रयास
- के और राज्य पैदावार के साथ सरकारी खरीद केंद्र और भंडारण की व्यवस्था मजबूत करें
- मोटे अनाजों का रकबा 4.5 करोड़ हेक्टेयर से 2.5 करोड़ हेक्टेयर हो गया, इसे बढ़ाया जाए
- देश में फूड प्रोसेसिंग यूनिटों को सब्सिडी दी जाए और किसानों को स्मार्ट प्रशिक्षण दिया
- अभियान चलाकर ग्रामीण और शहरी लोगों को मोटे अनाजों की पोषकता के बारे में बताया जाए
- गांवों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मोटा अनाज आवश्यक रूप से वितरित किया जाए

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