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Mumbai Monkeypox: मंकीपॉक्स के खतरे को देखते हुए प्रशासन हुआ चौकन्ना, नागरिकों की सुरक्षा के लिए तैयार किया जा रहा है ये प्लान

देश में मंकीपॉक्स का संकट बढ़ता नजर आ रहा है। मंकीपॉक्स के मामले मिलने के साथ ही मुंबई में प्रशासन पूरी तरह चौकन्ना हो गया है। गौरतलब है कि मनपा प्रशासन ने मंकीपॉक्स से निपटने के लिए तमाम तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। मुंबई के लोगों की सुरक्षा के लिए मनपा प्रशासन ने पहले ही कमर कस ली है।

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Monkeypox

कोरोना वायरस के बाद अब देश में मंकीपॉक्स (Monkeypox) ने भी आतंक मचा दिया है। कुछ देशों में मंकीपॉक्स के मरीज कई सामने आ रहे हैं। अब भारत में भी मंकीपॉक्स के मरीज मिलने लगे हैं। हालांकि मुंबई में अभी तक मंकीपॉक्स के एक भी मामले सामने नहीं आए है। लेकिन मुंबई के लोगों की सुरक्षा को देखते हुए मनपा प्रशासन (Municipal Administration) ने तैयारियां शुरू कर दी है।

इस घातक बीमारी के खतरे को देखते हुए पहले ही मनपा के चिंचपोकली स्थित कस्तूरबा गांधी हॉस्पिटल में आइसोलेशन बेड तैयार कर दिए गए हैं। वहीं संदिग्ध मरीजों के सैंपल नेशनल वायरोलॉजी ऑफ पुणे की लैब में भेजे जाएंगे। मनपा के अतिरिक्त आयुक्त डॉ संजीव कुमार ने इस बात की जानकारी दी है। वहीं, दूसरी तरफ मनपा प्रशासन के स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक फिलहाल मुंबई में अभी तक एक भी मंकीपॉक्स का संदिग्ध नहीं पाया गया है। यह भी पढ़ें: Mumbai: 'महज 1 रुपए में करें मुंबई की सैर', BEST ने शुरू की सुपर सेवर स्कीम, जानें क्या है ये योजना और कैसे उठा सकते हैं लाभ

बता दें कि मनपा के केईएम, नायर, सायन और कूपर हॉस्पिटलों समेत16 उपनगरीय हॉस्पिटलों और सभी दवाखानों को आदेश दे दिया गया हैं कि किसी भी मरीज में मंकीपॉक्स के लक्षण दिखें तो फौरन स्वास्थ्य विभाग को सूचित किया जाए। गौरतलब है कि मंकीपॉक्स की बीमारी के लक्षणों में मरीज के शरीर पर फोड़े, ठंड लगना, बुखार, सिरदर्द, हड्डियों में दर्द, हाथ-पैर, चेहरे और पेट पर लाल चट्टे, ग्रंथियों में सूजन आदि शामिल हैं। ऐसे लक्षणों वाले मरीजों के बारे में तुरंत मनपा प्रशासन को खबर करने की अपील की गई है।

इन लोगों को हो सकता है मंकीपॉक्स से ज्यादा खतरा:

मंकीपॉक्स होने पर शख्स के शरीर पर 2 से 4 हफ्तों तक लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
डब्लूएचओ के मुताबिक, मंकीपॉक्स उन लोगों से फैलता है जो पहले से मंकीपॉक्स से पीड़ित हों। जो व्यक्ति मंकीपॉक्स के मरीज के करीब रहता हो उसके लिए इस वायरस की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है।

डब्लूएचओ के निर्देशानुसार मंकीपॉक्स से बचाव के लिए जंगली जानवरों से बचकर रहें खासकर उनसे दूरी बनाकर रखें जो बीमार हों या मरे हुए हों। इन जानवरों के मीट, खून और शरीर के अन्य हिस्सों से भी पूरी तरह दूरी बनाकर रखें।
डब्लूएचओ का कहना है कि जो पुरुष आपस में समलैंगिक पुरुष, उनमें मंकीपॉक्स फैलने का खतरा ज्यादा है।
मंकीपॉक्स बॉडी फ्लुइड्स और पीड़ित व्यक्ति के साथ सोने पर फैल सकता है।
स्मॉलपॉक्स के लिए बनाए गए एंटीवायरल ट्रीटमेंट को ही मंकीपॉक्स के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
जबतक कि मीट पूरी तरह ना पका हुआ हो उसे ना खाएं।
घर का पालतू जानवर यदि संक्रमित हो जाए तो उसे 30 दिनों तक क्वारंटाइन रखें।