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‘हिंदू विदेशी शब्द…’ मोहन भागवत ने रामायण-महाभारत से जोड़कर कह दी बड़ी बात, जानिए क्या बोले RSS प्रमुख

Mohan Bhagwat: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि “हिंदू” शब्द भारतीय नहीं बल्कि विदेशी मूल का है और रामायण-महाभारत में इसका उल्लेख नहीं मिलता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है, बल्कि एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है।

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मुंबई

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Imran Ansari

Feb 07, 2026

RSS chief Mohan Bhagwat spoke about the word Hindu in Mumbai

Mohan Bhagwat: हिंदू शब्द को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर बवाल होता रहता है, लेकिन आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने बता दिया है कि हिंदू शब्द भारतीय नहीं बल्कि विदेशी है। उन्होंने यह भी कहा कि रामायण और महाभारत में कहीं भी हिंदू शब्द का जिक्र नहीं किया गया है। इसके साथ ही RSS को लेकर साफ कर दिया कि संघ कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है।

आपको बात दें कि आरएसएस के 100 साल पूरे के उपलक्ष्य में शनिवार को मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर में एक भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जहां संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोई राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि संघ से जुड़े कई लोग समाज और राजनीति के अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय हैं। उन्होंने संघ की विचारधारा, उसके कार्यों और ‘हिंदू’ शब्द की उत्पत्ति पर विस्तार से चर्चा करते हुए सभी धर्मों के प्रति सम्मान और समभाव की बात रखी। उनका कहना था कि भारतीय होना सिर्फ नागरिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक विशेष स्वभाव और संस्कार को दर्शाता है। यह ऐसा जोड़ने वाला स्वभाव है, जो समाज को एक सूत्र में बांधता है और जिसे अनुशासन, सेवा और समर्पण के माध्यम से और मजबूत किया जाना चाहिए।

Mohan Bhagwat का बयान

मोहन भागवत ने संघ की प्रकृति और उसकी विशिष्टता को समझाते हुए कहा कि आमतौर पर इंसान किसी भी संस्था या विचार को दूसरों से तुलना करके समझने की कोशिश करता है, लेकिन संघ के संदर्भ में यह तरीका सही नहीं बैठता। उन्होंने कहा कि संघ का कोई “कंपेरेबल” विकल्प ही नहीं है। इसे समझाने के लिए उन्होंने संस्कृत श्लोक का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे आकाश की तुलना सिर्फ आकाश से ही की जा सकती है, समुद्र जैसी विशाल जलराशि दूसरी नहीं होती और राम-रावण का युद्ध अपने आप में अद्वितीय था, उसी तरह संघ भी अपनी तरह का अकेला संगठन है। इसलिए संघ को किसी पार्टी, संस्था या सामान्य संगठन की श्रेणी में रखकर देखना उसकी वास्तविक प्रकृति को समझने में भ्रम पैदा करता है।

उन्होंने आगे कहा कि अक्सर लोग संघ को दूर से या सतही रूप में देखकर राय बना लेते हैं, जिससे गलतफहमियां और बढ़ जाती हैं। लोग केवल संघ के कार्यक्रमों या बाहरी गतिविधियों को देखकर उसे दूसरे संगठनों की तरह समझ लेते हैं, जबकि संघ का मूल उद्देश्य समाज निर्माण, चरित्र निर्माण, और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना है। भागवत ने कहा कि यदि संघ को नजदीक से, उसके कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर, और उसके विचारों को गहराई से समझा जाए, तो यह भ्रम अपने आप दूर हो जाएगा कि संघ किसी राजनीतिक दल या साधारण संगठन की तरह काम करता है।