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एनसीपी नेता का दावा, महाराष्ट्र के कुछ गांवों ने गुजरात में विलय की मांग की

महाराष्ट्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही हैं। एनसीपी की सुरगाणा तालुका इकाई के प्रमुख चिंतामन गावित ने बताया कि आजादी के 75 साल बाद भी नासिक के सुरगाणा तालुका के कई गांवों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। अगर इन गांवों का विकास नहीं हो सकता हैं, तो इन्हें गुजरात में मिला दें।

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Maharashtra Village

महाराष्ट्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता ने एक बड़ा दावा किया हैं। शुक्रवार को एनसीपी के एक स्थानीय नेता ने दावा किया कि उत्तरी महाराष्ट्र के नासिक जिले के कुछ गांवों ने मांग की है कि उन्हें गुजरात में शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि वे फिलहाल उदासीनता और विकास की कमी की प्रॉब्लम से जुंझ रहा हैं। यह मांग कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई के इस दावे पर उपजे विवाद के बाद आई है कि दक्षिणी महाराष्ट्र में जाट तहसील के गांव कभी उनके राज्य में विलय करना चाहते थे।

एनसीपी की सुरगाणा तालुका इकाई के प्रमुख चिंतामन गावित ने बताया कि आजादी के 75 साल बाद भी नासिक के सुरगाणा तालुका के कई गांवों में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। अगर इन गांवों का विकास नहीं हो सकता हैं, तो इन्हें गुजरात में मिला दें। चिंतामन गावित ने मीडिया को बताया कि उन्होंने 30 नवंबर को तहसीलदार सचिन मलिक को इस आशय का एक ज्ञापन सौंपा था। यह भी पढ़े: मुंबई: 17 दिन हॉस्पिटल में रहने के बाद शख्स की मौत, पुलिस ने वाइफ को किया गिरफ्तार

बता दें कि चिंतामन गावित ने कहा कि इसका किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई भी लेना-देना नहीं है। डोलारे, अलंगुन, सुभाष नगर और काठीपाड़ा गांवों के निवासी इस मांग को लेकर एक साथ आए हैं, इसमें और भी कुछ गांव हैं। गुजरात का धरमपुर तालुका 15 किलोमीटर दूर है और वासदा 10 किलोमीटर दूर है। हम हमेशा वहां जाते हैं और हम सालों से विकास में अंतर देख रहे हैं।

एनसीपी नेता चिंतामन गावित ने दावा किया कि उन्हें नंदुरबार जिले के नवापुर और धड़गांव के लोगों के भी फोन आए जिन्होंने गुजरात में शामिल किए जाने की मांग का सपोर्ट किया। नासिक और नंदुरबार जिलों के सीमावर्ती क्षेत्र मुख्य रूप से आदिवासी बहुल हैं। चिंतामन गावित ने आगे कहा की हमने 4 दिसंबर को पंगारने गांव में एक बैठक बुलाई है, जहां आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़िया सड़कें, विश्वसनीय बिजली आपूर्ति और हेल्थ, पानी और परिवहन सुविधाएं हैं।

तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन: बता दें कि चिंतामन गावित ने आगे बताया कि महाराष्ट्र में सड़कें अच्छी नहीं हैं, 24 घंटे बिजली नहीं है और लोगों को हर साल पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। सिंचाई परियोजनाएं भी नहीं हैं। नतीजतन, खेती पूरी तरह से मानसून पर पूरी तरह निर्भर है। लोग आजीविका के लिए सालों से पलायन कर रहे हैं। तहसीलदार को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि महाराष्ट्र सरकार को या तो ‘‘विकास करना चाहिए’’ या इन गांवों के गुजरात में विलय की इजाजत देनी चाहिए।