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success : rajasthan के घांची समाज को महाराष्ट्र में एक करने की मुहिम

घांची समाज में युवा पीढ़ी को स्वावलंबी बनाना ही मुख्य लक्ष्य

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मुंबई

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Subhash Giri

Jun 29, 2019

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success : rajasthan के घांची समाज को महाराष्ट्र में एक करने की मुहिम

सुभाष गिरी

मुंबई. घांची समाज को बुलंदियों के शिखर पर पहुंचाने के लिए घांची समाज सेवा समिति बखूबी जिम्मेदारी के साथ काम कर रहा है। घांची समाज सेवा समिति समाज को जोडऩे के लिए मुंबई में विविध आयोजन करती है। जैसे होली सम्मेलन, दीपावली समारोह, समाज के होनहार बच्चों को सम्मानित करना। घांची समाज सेवा समिति मुंबई के अध्यक्ष दलपतराम बोराणा ने कहा कि समाज में एक नई ऊंचाई देने के लिए निष्ठा से कार्य करना जरूरी होता है, जिसे हम कर रहे हैं। मुंबई ही नहीं, बल्कि ठाणे, नवी मुंबई, रायगढ़, पालघर, नासिक व पुणे तक दौरा कर घांची समाज के गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए समिति अपनी बखूबी जिम्मेदारी निभा रही है। घांची समाज सेवा समिति के साथ ही समस्त राजस्थान प्रवासी संघ के माध्यम से भी महानगर में अनेक उपक्रम किए जाते हैं, घांची समाज को जोडऩे के लिए हम सदैव तत्तर हैं। घांची समाज का मुख्य उद्देश्य है बच्चों में अभिभावक, समाज व राष्ट्र के प्रति नैतिक जिम्मेदारी का बोध करवाना है, जिससे वे जागरूक एवं उत्तरदायी नागरिक बन सके। बच्चों को स्वालंबी बनाया जाय, जिससे वह स्वयं के बल पर अपने परिवार व माता-पिता की सेवा कर सकें।
घांची समाज को महाराष्ट्र में
दिलवाया अतिरिक्त ओबीसी का दर्जा
घांची समाज सेवा समिति मुंबई के अध्यक्ष मूल निवासी जोधपुर के दलपतराम बोराणा के अथक प्रयास से ही आज राजस्थान के महाराष्ट्र में रह रहे घांची समाज को महाराष्ट्र के गजट में ओबीसी का दर्जा प्राप्त हुआ है। दलपत बोराणा इसके लिए 2005 से प्रयासरत थे। दलपत बोराणा ने बताया कि राजस्थान और गुजरात से घांची जाति के लोग विगत अनेक वर्षो से महाराष्ट्र मे बसे है। घांची जाति की अलग-अलग क्षेत्रो में अलग -अलग पहचान है। जिन्हे राजस्थान और गुजरात मे घांची, यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक में तेली, शाहू, मोदी, माडली, घांची तमोली अदि नामों से पहचान बन चुकी है। इन सभी जातियों के नागरिक अत्यंत ही सामान्य जिंदगी गुजर-बसर कर रहे है। इनका रहन-सहन बिलकुल ओबीसी के समकक्ष है। यह समाज अपने-अपने मूल प्रांतो मे ओबीसी में शामिल है। ऐसे में घांची समाज को भी महाराष्ट्र में ओबीसी जाति में शामिल किया जाए। घांची समाज को महाराष्ट्र के गजट में औपचारिकताएं पूरी कर इन्हें ओबीसी का दर्जा दिलाने की मांग की थी, जिसका प्रयास रंग लाया और जून 2019 को घांची समाज को आयोग की सिफारिश पर तेली को उपजाति होने पर अतिरिक्त ओबीसी में शामिल किया गया है। घांची समाज को महाराट्र में ओबीसी का दर्जा दिलाने में सफल रहे, जिसकी राजस्थानी समाज में खूब सराहना की गई। घांची समाज के प्रवासियों ने दलपत बोराणा के प्रयासों का लोहा माना। घांची समाज सेवा समिति के अध्यक्ष दलपत बोराणा ने नासिक में महाराष्ट्र ओबीसी विभाग के भूषण कांडिले, राजस्थान के पूर्व उप मुख्य सचेतक मदन राठौड, अन्नाराम बोराणा, पूर्व जिला प्रमुख सिरोही, भीमजी भाटी, पूर्व विधायक पाली, आयोग के सदस्य कैलाश राटौड़, महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री जयदत्त क्षीरसागर, पूर्व सामाजिक न्याय मंत्री चंद्रकांत हंडोरे, मोहनलाल बोराणा, शंकर सोलंकी, पदमाराम बोराणा सहित जिन लोगों ने इस कार्य में सहयोग किया है।

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