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गुजराती समाज की धरोहर है स्वामीनारायण मंदिर

लक्ष्मीनारायण देव ट्रस्ट की ओर से संचालित

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गुजराती समाज की धरोहर है स्वामीनारायण मंदिर

गुजराती समाज की धरोहर है स्वामीनारायण मंदिर

कल्याण. साधना के साथ-साथ समाजसेवा में निपुण गुजराती समाज की धरोहर स्वामीनारायण मंदिर कई मायनों में विशेष है। सेवा और अध्यात्म दोनों का यह संगम है। इसकी स्थापना 61 साल पहले 1958 में हुई थी। लक्ष्मीनारायण देव ट्रस्ट की ओर से संचालित स्वामीनारायण मंदिर गुजराती समाज के लिए महत्वपूर्ण देव स्थान है, जहां कल्याण का गुजराती समाज रोज ही भाव से भरकर इकठ्ठा होता है।
मंदिर का देखरेख महंत निर्गुणदास करते हैं और पूजा-पाठ की जिम्मेदारी रामानुजदास को दिया गया है। ट्रस्ट के ट्रस्टी नवीनभाई ठक्कर ने बताया कि फिलहाल ट्रस्ट की ओर से कई बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, रहने-खाने का इंतजाम के साथ गरीबों की समय-समय सहायता पर की जाती है। अभी हाल ही ट्रस्ट की ओर से आदिवासी समाज के लिए 10 हजार चप्पल और सवा दो लाख नग आम वितरित किए गए। इसके अलावा गरीबों की मदद, निशुल्क सेवा, मेडिकल कैम्प, ब्लड डोनेशन सहित पानी और पर्यावरण के लिए समय-समय लोगों को जनजागृत करना ही संस्था का मूलमंत्र है।

अस्पताल बनाने की योजना
ट्रस्ट की भविष्य में अस्पताल बनाने की योजना है, ताकि गोर-गरीब लोगों का निशुल्क इलाज हो सके। स्वामी निर्गुण महाराज के आने के बाद साधना और संशाधन बदल गए हैं। कल्याण में बड़े पैमाने पर गुजराती समाज रहता है और साधना और सेवा के लिए रोज भारी संख्या में लोग इकठ्ठा होते हैं। ट्रस्ट की ओर से महिलाओं का विंग भी बनाया गया है, जिसमें 280 महिलाओं का समावेश है। महिला विंग की प्रमुख छायाबेन हर्षद बुद्धदेव ने कहा कि हर समय महिलाओं का विंग सामाजिक कार्य के लिए तत्पर रहता है। उन्होंने कहा अक्षय तृतीया से लेकर ज्येष्ठ पूर्णिमा तक भगवान स्वामीनारायण को चंदन का लेप लगाया जाता है और हम सभी महिलाएं नियमित साधना और तप करती रहती हैं।

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