निलंबित अधिकारी ने अपने विदाई समारोह कार्यक्रम के दौरान तहसीलदार कार्यालय की आधिकारिक कुर्सी पर बैठकर अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘याराना’ का मशहूर गाना गाया। जिसका वीडियो वायरल होने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई हुई।
महाराष्ट्र में एक तहसीलदार को विदाई समारोह में फिल्मी गाना गाने की वजह से निलंबित कर दिया गया है। मामला सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद तूल पकड़ गया। जिसके बाद राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने तहसीलदार के निलंबन की जानकारी दी।
जानकारी के मुताबिक, नांदेड़ जिले के उमरी में तैनात तहसीलदार प्रशांत थोरात का हाल ही में लातूर के रेनापुर में तबादला हुआ था। 30 जुलाई को उन्होंने उमरी का कार्यभार छोड़ा और उसी दिन रेनापुर में नई जिम्मेदारी संभाल ली। इसके बाद 8 अगस्त को उमरी तहसील कार्यालय में उनके लिए विदाई समारोह आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान थोरात ने अपने तहसीलदार कार्यालय की आधिकारिक कुर्सी पर बैठकर 1981 में आई अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘याराना’ का किशोर कुमार का मशहूर गाना ‘यारा तेरी यारी को’ गाया। इस दौरान उनके आस-पास मौजूद लोग तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ा रहे थे। यही वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
वीडियो सामने आने के बाद कई ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि एक जिम्मेदार सरकारी पद पर बैठे अधिकारी का यह आचरण अनुचित है। मामला बढ़ने पर नांदेड़ के जिलाधिकारी ने इस घटना की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी। रिपोर्ट में कहा गया कि थोरात के आचरण से प्रशासन की छवि धूमिल हुई है और उन्होंने महाराष्ट्र सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1979 का उल्लंघन किया है। इसके बाद सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रशांत थोरात को निलंबित कर दिया।
मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, "तहसीलदार प्रशांत थोरात ने उमरी में आयोजित विदाई समारोह के दौरान तहसीलदार की आधिकारिक कुर्सी पर बैठकर गाना गाया। इस कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ और बड़े पैमाने पर वायरल हो गया। जो एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी के आचरण के अनुकूल नहीं माना जा सकता। इस घटना से शासन और प्रशासन की छवि धूमिल हुई है और इसे बेहद गंभीर मामला माना गया है। नांदेड के जिलाधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर प्रशांत थोरात को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जा रहा है।"
बावनकुले ने कहा, "हर सरकारी अधिकारी के लिए यह आवश्यक है कि वह जिस पद पर बैठा है, उसकी गरिमा, समय, स्थान और परिस्थिति का ध्यान रखे। सरकारी पद पर कार्यरत रहते हुए उस पद की जिम्मेदारियां, मर्यादा और प्रतिष्ठा बनाए रखना प्रत्येक अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। पारिवारिक या निजी आयोजनों में इस तरह की प्रस्तुति दी जा सकती है, लेकिन सरकारी मंच पर आचरण की मर्यादा का पालन करना अपेक्षित है। सभी सरकारी अधिकारियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे इस घटना को गंभीरता से लें और अपने आचरण से पद की मर्यादा और प्रतिष्ठा को बनाए रखें।"