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किष्किंधा के महंत गोविंद दास की चुनौती, नासिक के साधु-संत दिखाएं सबूत

भगवान हनुमान की जन्म स्थली को लेकर फिर उठा विवादकर्नाटक-आंध्र प्रदेश के बीच पहले से झगड़ा, अब महाराष्ट्र भी कूदा

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किष्किंधा के महंत गोविंद दास की चुनौती, नासिक के साधु-संत दिखाएं सबूत

किष्किंधा के महंत गोविंद दास की चुनौती, नासिक के साधु-संत दिखाएं सबूत

मुंबई. भगवान हनुमान Hanuman की जन्म स्थली को लेकर फिर विवाद शुरू हो गया है। नासिक के साधु-संतों का दावा है कि हनुमान जी का जन्म त्र्यंबकेश्वर trimbakeshwar के पास स्थित अंजेरी में हुआ था। इसे किष्किंधा के महंत गोविंद दास ने खारिज कर दिया है। उन्होंने नासिक Nashik के साधु-संतों को सबूत पेश करने की चुनौती दी है। महंत ने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में साफ लिखा है कि पवन पुत्र हनुमान का जन्म किष्किंधा में हुआ था। किष्किंधा Kishkindha कर्नाटक Karnataka में हंपी के पास है। वहीं, कर्नाटक के दावे को आंध्र प्रदेश खारिज करता रहा है। आंध्र प्रदेश के साधु संतों के मुताबिक संकट मोचक हनुमान का जन्म तिरुमला की सप्तगिरी की एक पहाड़ी पर हुआ था। तीनों राज्यों के साधु-संतों के दावों से मामला पेचीदा हो सकता है। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास चित्रकूट के जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य तिरुमला की अंजानाद्रि पहाड़ी को हनुमान का मूल जन्म स्थान मानते हैं। राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास (अयोध्या) के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी ने कहा कि इसे लेकर आपस में झगडऩे की जरूरत नहीं है। हनुमान जी शक्ति के प्रतीक हैं। हम सब को राष्ट्र हित में काम करना चाहिए।

तीन राज्य-तीन जगह
हनुमान जी की जन्म स्थली को लेकर मतभेद संतों के बीच हैं। किष्किंधा, अंजेरी (महाराष्ट्र) व अंजनाद्रि (तिरुमला) में उनके जन्म को लेकर संतों के अलग-अलग तर्क हैं। धमाचार्यों का कहना है कि आपस में झगडऩे से कुछ हासिल नहीं होगा। सबूतों-तथ्यों पर गौर कर संतों को सर्वमान्य फैसला करना चाहिए।

कहां है अंजेरी
अंजेरी नासिक जिले की त्र्यंबकेश्वर तहसील में स्थित है। यहां एक छोटी पहाड़ी पर हनुमान जी और माता अंजनी का मंदिर बना है। मान्यता है कि माता अंजनी के नाम पर ही अंजेरी को नाम मिला है। दावा है कि यहीं पर हनुमान जी का जन्म हुआ था। वनवास के दौरान भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के साथ पंचवटी में रहे थे। सीता हरण के बाद उनकी खोज में यहीं से किष्किंधा की ओर गए थे।

किष्किंधा कर्मभूमि
शिवमोगा स्थित रामचंद्रपुरा मठ के राघेश्वर भारती ने वाल्मीकि रामायण का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सीता जी को हनुमान ने खुद बताया था कि उनका जन्म कर्नाटक के गोकर्णा में हुआ है। इसलिए गोकर्णा हनुमान जी की जन्म स्थली है। किष्किंधा का अंजेयनाद्रि क्षेत्र उनकी कर्मस्थली है।

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