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कृष्ण जन्म पर झूम उठे Powaikar, भक्तों के जयकारों से गूंजा श्रीमद्भागवत कथा का प्रांगण

कृष्ण जन्म ( Krishna Birth ) पर झूम उठे पवईकर ( Powaikar ), भक्तों ( Devotees ) के जयकारों ( Cheers ) से गूंजा श्रीमद्भागवत कथा ( Srimad Bhagwat Katha ) का प्रांगण, भगवान को खोजने के लिए कहीं भी जाने को जरूरत नहीं, भगवान खुद आकर भवसागर ( Bhavsagar ) से करा देते हैं मुक्त

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कृष्ण जन्म पर झूम उठे Powaikar, भक्तों के जयकारों से गूंजा श्रीमद्भागवत कथा का प्रांगण

कृष्ण जन्म पर झूम उठे Powaikar, भक्तों के जयकारों से गूंजा श्रीमद्भागवत कथा का प्रांगण

मुंबई. पवई साकी विहार रोड के तुंगा गांव स्थित शिवशक्ति नगर शांति कम्प्लेक्स में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान तज्ञ में वृंदावन से पधारे पूज्य गुरु राघवेंद्र जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण की जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि बाल गोपाल का जन्म देवकी और वासुदेव के आठवें संतान के रूप में हुआ है। पवई विकास संस्था के तत्वावधान में चल रहे कथा को आगे बढ़ाते हुए महराज ने देवकी व वासुदेव के अर्थ को आगे समझाते हुए कहा कि देवकी यानी जो देवताओं की होकर जीवन जीती है और वासुदेव का अर्थ है, जिसमें देव तत्व का वास हो। ऐसे व्यक्ति अगर विपरीत परिस्थितियों की बेड़ियों में भी क्यों न जकड़े हों, भगवान को खोजने के लिए उन्हें कहीं जाना नहीं पड़ता है, बल्कि भगवान स्वयं आकर उसकी सारी बेड़ी-हथकड़ी को काटकर उसे भवसागर से मुक्त करा दिया करते हैं। डॉ. मिश्र ने कहा कि हर मनुष्य के जीवन में छह शत्रु हैं, काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ व अहंकार।

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कृष्ण की भक्ति सफल हो जाता है जीवन...
जब हमारे अंदर के यह छह शत्रु समाप्त हो जाते हैं तो सातवें संतान के रूप में शेष जी जो काल के प्रतीक हैं वो काल फिर मनुष्य के जीवन में आना भी चाहे तो भगवान अपने योग माया से उस काल का रास्ता बदल देते हैं । तब 8वें संतान के रूप में भगवान श्री कृष्ण का अवतार होता है। जिसके जीवन में भगवान श्री कृष्ण की भक्ति आ गई तो ऐसा समझना चाहिए कि उसका जीवन सफल हो गया।

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बड़ी संख्या में भक्तों की उपस्थित...
इस अवसर पर नरेंद्र उपाध्याय, इंद्रमणि शुक्ला, प्रभाकर मिश्रा, मनोज राय, विनोद राजभर, सुधीर सिंह वीरेंद्र, चंद्रकांत मिश्रा, रूप नारायण तिवारी नीरज भारद्वाज राजू पाल विजय प्रसाद नरेश कुशवाहा राजकुमार यादव आदि समेत बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।

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