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Nagpur: लाख कोशिशों के बाद भी नहीं बची 15 महीने की मासूम की जान, विस्तारा फ्लाइट में बिगड़ी थी तबियत

Vistara Flight: महाराष्ट्र के नागपुर में स्थित KIMS-किंग्सवे अस्पताल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। जिसमें 15 महीने की बच्ची के निधन की पुष्टि की गयी है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Aug 31, 2023

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विस्तारा फ्लाइट में बच्ची की जान बचाने वाले डॉक्टर

KIMS Kingsway Hospital Nagpur: बेंगलुरु से दिल्ली जा रही विस्तारा एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या यूके-814ए में रविवार की शाम 15 महीने की एक मासूम की तबियत अचानक बिगड़ गयी। इसकी भनक जैसे ही विमान में मौजूद एम्स नई दिल्ली के पांच डॉक्टरों को लगी वह बच्ची को बचाने के लिए दौड़ पड़े और किसी तरह बच्ची की जान बचाई। इस बीच विमान की नागपुर में आपात लैंडिंग करायी गयी और बच्ची को किम्स-किंग्सवे अस्पताल (KIMS-Kingsway Hospital) में भर्ती कराया गया। लेकिन अब अस्पताल से दुखद खबर आई है।

महाराष्ट्र के नागपुर में स्थित KIMS-किंग्सवे अस्पताल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। जिसमें बच्ची के निधन की पुष्टि की गयी है। बयान में कहा गया है, पिछले तीन दिनों के अथक संघर्ष के बाद आज (31 अगस्त) सुबह 3.15 बजे 15 महीने की मासूम की मृत्यु हो गई। उसकी हालत गंभीर थी।

नई दिल्ली जाने वाली विस्तारा की फ्लाइट को रविवार देर रात मेडिकल इमरजेंसी के चलते नागपुर की ओर मोड़ दिया गया. बच्ची हृदय की समस्या से पीड़ित थी और उसका ऑपरेशन हुआ था। उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही उसकी हालत गंभीर हो गयी। बच्ची सांस नहीं ले रही थी और उसका शरीर ठंडा पड़ गया था, लेकिन उसी फ्लाइट में सफर कर रहे डॉक्टरों के समूह ने उसकी जान बचा ली।

नागपुर के किम्स-किंग्सवे अस्पताल ने जारी किया बयान-

बाद में बच्ची को KIMS किंग्सवे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें एम्स के चार रेजिडेंट डॉक्टर और आईएलबीएस (ILBS) के एक डॉक्टर शामिल थे। मिली जानकारी के अनुसार, विमान ने रविवार रात नौ बजे बेंगलुरु से उड़ान भरी और करीब 30 मिनट बाद उसमें सवार बच्ची के लिए आपात मदद की घोषणा की गई। बच्ची बेहोश हो गयी थी। जिसके बाद डॉ नवदीप कौर, डॉ दमनदीप सिंह, डॉ ऋषभ जैन, डॉ ओइशिका और डॉ अविचला ने विमान में ही बच्ची का इलाज किया और सीपीआर देकर उसकी जान बचाई।

बच्ची जन्म से ही हृदय रोग (सायनोटिक) से पीड़ित थी। अस्पताल में भर्त्ती कराये जाने के बाद भी बच्ची की हालत नाजुक बनी हुई थी। उसे वेंटिलेटर पर चौबीसों घंटे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया था। अंत में उसे बचाने की सारी कोशिशें नाकाम साबित हुई।