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चमकी दो भाइयों की किस्मत, किया कुछ एेसा की 20 मिनट में ही कमा डाले लाखों रुपए

अक्सर लोग लाखों कमाने के लिए कई सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं। तब जा कर कहीं वो इतना कमा पाता है की उसका परिवार अच्छे से अपनी जिंदगी जी सकते।

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चमकी दो भाईयों कि किस्मत सिर्फ20 मिनट में बने लखपति

Fishermen netted fish which fetched them rupees 5-5 lakh

नई दिल्ली। अक्सर लोग लाखों कमाने के लिए कई सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं। तब जा कर कहीं वो इतना कमा पाता है की उसका परिवार अच्छे से अपनी जिंदगी जी सकते। कई लोग लखपति बनने का ख्वाब तो देखते है लेकिन उसे पूरा करने में उन्हें ना जाने कितने साल लग जाते हैं। लेक्न कहते है न जिसकी किस्मत उस पर बेहरबान हो वो क्या नहीं कर सकता। ऐसा ही कुछ एक मछुआरे के साथ भी हुआ। उसकी किस्मत के दरवाजे ऐसे खुले की वो सिर्फ 20 मिनट में लखपति बन गया।

भाईयों कि किस्मत चमकी

पालघर के दो मछुआरे भाई रोज की तरह कल भी जाल लेकर मछली पकड़ने गए हुए थे। लेकिन वहां पर जो मछली उनके जाल में फंसी उसने उन मछुआरों को लाखों का मालिक बना दिया। मुंबई तट पर लौटते समय उनके जाल में घोल मछली फंस गई। दोनों आम दिनों की तरह बाजार में मछली बेचने के लिए पकड़ने के लिए घर से निकले थे। लेकिन सौभाग्य से उन्हें यह मछली मिल गई जो पूर्वी एशिया में अपने अंदरुनी अंगों से बनने वाले औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है। इस मछली को सोने का दिल वाली कहा जाता है। रविवार को जो मछली पकड़ी गई वह आमतौर पर सिंगापुर,मलेशिया, इंडोनेशिया, हॉन्ग कॉन्ग और जापान को निर्यात की जाती है। इस मछली के एक किलो की कीमत भी 800 से 1000 के बीच होती है।

20 मिनट में बने लाखों के मालिक

इस मछली का वजन तकरीबन 30 किलो का था। इसके मिलने के बाद दोनों भाईयों ने इसकी निलामी रखी जिसके बाद दोनो भाईय लखपति बन गए। महेश और उनके भाई ने जो मछली पकड़ी गई थी इसकी खबर हर जगह आ की तरह फैल गई। फिर मछली को बेचने के लिए बोली लगाई गई। मछली को खरीदने के लिए व्यापारियों की लंबी लाइन लगी थी। यह बोली बीस मिनट तक चली और और मछली को 5.5 लाख रुपए में एक व्यापारी ने खरीद लिया।


इसलिए है इतनी किमती
घोल मछली की स्किन को उच्च क्वालिटी कोलेजन का अच्छा स्रोत माना जाता है। इससे फंक्शनल फूड और कॉस्मेटिक उत्पाद और दवाई भी बनाई जाती है। इसके पंखों का इस्तेमाल फार्मास्यूटिकल कंपनियां घुलने वाले टांके और वाइन शुद्धिकरण के लिए इस्तेमाल करती हैं। इसी वजह से घोल की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है।